कंपनियों द्वारा सेवा प्रदाताओं को भुगतान में देरी

कंपनियों द्वारा सेवा प्रदाताओं को भुगतान में देरी

भोपाल [महा मीडिया] देश की कई बड़ी कंपनियां सेवा प्रदाताओं को भुगतान में देरी कर रही हैं। इससे कंसल्टिंग और लॉ फर्मों तथा छोटी तथा मझोली कंपनियों पर पर सबसे ज्यादा मार पड़ रही है। देश की एक प्रमुख कॉरपोरेट लॉ फर्म  ने कहा, 'भुगतान में दो से चार महीने तक की देरी हो रही है। देश की कुछ शीर्ष कंपनियों के बीच ऐसा रुझान देखने को मिल रहा है।' उन्होंने कहा कि भुगतान में देरी इस बात का संकेत है कि सेवा प्रदाताओं को प्राथमिकता सूची में वरीयता नहीं दी जा रही है। इसके पीछे यह सोच है कि सेवा प्रदाता कंपनियों के पास विनिर्माण कंपनियों जैसी तात्कालिक मजबूरी नहीं है लेकिन हकीकत यह है कि लॉ फर्मों की भी वेतन के रूप में भारी इनपुट लागत है। यही नहीं लॉ फर्मों को भी काम रोकना पड़ रहा है और कई मामलों में तो उन्हें अपना बकाया वसूलने के लिए ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता का सहारा लेना पड़ रहा है।घरेलू कंपनियां ही नहीं बल्कि बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी दो महीने की देरी से भुगतान कर रही हैं।  विनिर्माण के क्षेत्र में भी यही स्थिति है। कलपुर्जे बनाने वाली एक कंपनी के एक प्रवर्तक ने कहा कि वाहन बनाने वाली देश की एक बड़ी कंपनी अपने आपूर्तिकर्ताओं से ज्यादा छूट मांग रही हैं जो एक तरह से कीमतों में कमी का तरीका है। एक दिग्गज प्राइवेट इक्विटी फर्म के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि आम धारणा यह है कि चाहे अर्थव्यवस्था में तेजी हो या मंदी, वकील, अकाउंटेंट और सलाहकारों की हमेशा चांदी रहती है। लेकिन मौजूदा स्थिति में इन पेशों से जुड़ी फर्मों को भुगतान में देरी हो रही है क्योंकि वित्तीय बाजारों में ऋण की स्थिति बेहद तंग है। चालू वित्त वर्ष के आंकड़े कुछ महीने में उपलब्ध होंगे लेकिन सभी संकेतों से साफ है कि नकदी पर दबाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा, 'एनबीएफसी में मंदी और सरकारी बैंकों की स्थिति तंग होने से कई कंपनियों की कार्यशील पूंजी तक पहुंच कम हो गई है और इसका व्यापक असर दिखाई दे रहा है।' उन्होंने साथ ही कहा कि नवंबर 2019 में बैंक उधारी में वृद्धि महज 8 फीसदी रही जो नवंबर 2018 में 15 फीसदी थी। कई क्षेत्रों को इन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कार्यशील पूंजी के सिकुडऩे का एक दुष्प्रभाव यह हुआ है कि प्राइवेट इक्विटी फर्में कंपनियों को जरूरी पूंजी मुहैया करा रही हैं। उद्यमियों के पास फंड के बदले इक्विटी छोडऩे के अलावा कोई विकल्प नहीं है।  वित्त वर्ष 2020 के लिए क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक विकास की गति उम्मीद से कम रही है, सभी क्षेत्रों में मांग में कमी आई है और कार्यशील पूंजी का चक्र बढ़ गया है जिससे निर्माण सामग्री क्षेत्र जैसे उद्योगों की रेटिंग में कमी आई है।

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