भारतीय स्मार्टफोन कंपनियों को मिला अमेरिका का साथ 

भारतीय स्मार्टफोन कंपनियों को मिला अमेरिका का साथ 

नई दिल्ली (महामीडिया) भारतीय स्मार्टफोन मार्केट पर अबतक चीन का कब्जा रहा है। लेकिन जून में हुए भारत चीन सैन्य झड़प के बाद भारत ने चीन पर निर्भरता खत्म करने का बीड़ा उठा लिया है। सरकार ने चीनी एप्स को बैन करने से लेकर भारत में स्मार्टफोन के निर्माण जैसे कई अहम कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए अब भारतीय स्मार्टफोन कंपनियों को अमेरिका का साथ मिल गया है। 
अमेरिका की बड़ी टेलिकॉम Verizon, T-Mobile, AT&T जैसी कंपनियों ने अब भारत में बने फोन को बल्क में खरीदने की बात कर रही है। भारतीय स्मार्टफोन कंपनियां माइक्रोमैक्स, लावा समेत कई कंपनियों से अमेरिका की ये बड़ी कंपनियां लो कॉस्ट मोबाइल बनवा कर इसे अपने ब्रांड के तहत बेंचेंगी। दरअसल अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी टेलिकॉम कंपनियों ने यह फैसला किया है वो अब चीनी नहीं बल्कि भारतीय कंपनियों से फोन एसेंबल करवाएंगी। हालांकि भारतीय स्मार्टफोन कंपनियों से बातचीत अभी शुरुआती दौर में है।
अमेरिकी कंपनियां अभी तक सस्ते स्मार्टफोन बनाने के लिए चीन की टीसीएल और जेडटीई जैसी कंपनियों का सहारा लेती रही हैं। अब उम्मीद की जा रही है कि इन कंपनियों को लावा और माइक्रोमैक्स जैसी कंपनियां रिप्लेस कर पाएंगी।
भारत को आत्मनिर्भर बनाने और अमेरिका को सस्ते फोन मुहैया कराने को लेकर माइक्रोमैक्स के को-फाउंडर राहुल शर्मा ने कहा कि दुनिया के लिए वियतनाम और भारत अब स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग का नया ठिकाना होगा। राहुल शर्मा ने कहा कि चीन को टक्कर देने के माइक्रोमैक्स पूरी तरह से तैयार है और हम अमेरिकन मार्केट में भारतीय स्मार्टफोन सप्लाई करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
अभी मौजूदा दौर में भारत के स्मार्टफोन बाजार में रियलमी, ओपो, वीवो जैसी चीनी कंपनियों का कब्जा है। भारत में 7500 से 8000 की कीमत वाले स्मार्टफोन बाजार में इन कंपनियों की हिस्सेदारी 14,700 करोड़ की है। वहीं जियो के सस्ते स्मार्टफोन आने के बाद नोकिया और सैमसंग जैसे पुराने खिलाड़ियों का कारोबार भी प्रभावित होगा।
 

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