आईटी कंपनियों के लिए अनुबंधों का नवीनीकरण बना सिरदर्द

आईटी कंपनियों के लिए अनुबंधों का नवीनीकरण बना सिरदर्द

नई दिल्ली [ महा मीडिया ]अगले तीन महीनों के दौरान करीब 30 अरब डॉलर के आईटी आउटसोर्सिंग सौदों का नवीनीकरण होना है लेकिन अनिश्चित मांग परिदृश्य के कारण इन सौदों पर नकारात्मक प्रभाव पडऩे की आशंका है। आउटसोर्सिंग सलाहकारों और विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें आधे से अधिक सौदों के नवीनीकरण में देरी हो सकती है जबकि शेष सौदों का नवीनीकरण कम कीमत पर होने की आशंका है क्योंकि ग्राहक सौदे को जारी रखने के लिए छूट की मांग कर सकते हैं।
वैश्विक सलाहकार फर्म ओमडिया ने कहा कि अगले तीन महीनों के दौरान 29.2 अरब मूल्य के सौदों का नवीनीकरण होना है। उन्होंने कहा, 'हमारे अनुमान के अनुसार इनमें से कम से कम 50 फीसदी (अनुबंधों) के नवीनीकरण में या तो देरी होगी अथवा मूल्य में कमी होने की आशंका है।'
पारंपरिक तौर पर किसी वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों (अप्रैल से सितंबर की अवधि) को भारतीय आईटी सेवा कंपनियों के लिए सबसे अच्छी अवधि माना जाता है क्योंकि इसी दौरान नवीनीकरण संबंधी अधिकतर निर्णय लिए जाते हैं और नई परियोजनाएं शुरू की जाती हैं। हालांकि इस साल मांग परिदृश्य में अनिश्चितता के कारण कंपनियां अपने आईटी खर्च में कटौती करने के लिए मजबूर हुई हैं। अप्रैल तक करीब 6 अरब डॉलर मूल्य की परियोजनाएं पहले ही स्थगित हो चुकी हैं।
कोविड-19 वैश्विक महामारी गलत समय में आई है क्योंकि जून (पहली तिमाही) और सितंबर (दूसरी तिमाही) तिमाहियों के दौरान ग्राहक खर्च करना शुरू करते हैं। इसलिए यदि आप इस समय प्रभावित हुए तो आपकी वृद्धि बुरी तर प्रभावित हो जाएगी।
वैश्विक अनुसंधान फर्म गार्टनर ने 2020 में वैश्विक स्तर पर आईटी सेवा पर होने वाले खर्च को पहले ही 8 फीसदी घटाकर 952.4 अरब डॉलर कर दिया है। हालांकि अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों में प्रमुख ग्राहकों का कारोबार आंशिक तौर पर सुचारु होने के मद्देनजर ग्राहक धारणा में सुधार होने के आसार हैं

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