बुद्ध पूर्णिमा :भगवान बुद्ध से सीखें संयम और शांति से जीना

आज वैशाख माह की पूर्णिमा है। इसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था और उन्हें दिव्य ज्ञान क़ी प्राप्ति हुई थी। जीवन को सुखी और सफल  बनाने के लिए गौतम बुद्ध क़े उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं।भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश वाराणसी के पास सारनाथ में दिया और बौद्ध धर्म की स्थापना की। सारनाथ आज बौद्ध धर्म मानने वाले श्रद्धालुओं का प्रसिद्ग स्थान है।भगवान बुद्ध का जन्म ईसा पूर्व 623 में कपिलवस्तु के पास लुम्बिनी नामक स्थान पर हुआ था। संभ्रांत घराने में पैदा होने के बावजूद मात्र 27 वर्ष की आयु में  उन्होंने घर-परिवार का त्याग कर संन्यास ग्रहण कर लिया था। जिस स्थान पर उन्हें दिव्य ज्ञान या बोधकी प्राप्ति हुई उस स्थान को बोधगया कहा जाता है।ऐसा माना जाता है कि वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में उन्हें बोधिवृक्ष क़े नीचे दिव्य ज्ञान (बोध) की प्राप्ति हुई थी, तभी से इसे बुद्ब पूर्णिमा के रूप में मनाया जाने लगा। इस दिन बौद्ग धर्म क़े अनुयायी अपने घरों में दिये जलाते है और बौद्ध ग्रंथों का पाठ करते है।आज देश और दुनिया कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहे हैँ। चारोँ ओर भय, निराशा और चिंता का वातावरण व्याप्त है। मनुष्य, मनुष्य से दूरी बनाने के लिए विवश है। ऐसे में संयम और शांति के लिए भगवान बुद्ध क़े उपदेश आज भी कारगर है। परिस्थितियों के कारण आज मनुष्य में क्रोध एवं चिड़चिड़ापन व्याप्त है। भगवान बुद्ध कहते हैं मनुष्य को सदैव क्रोध करने से बचना चाहिए। क्योंकि क्रोधित व्यक्ति स्वार्थी हो जाता है। क्रोधित व्यक्ति कभी सच के मार्ग नहीं चल सकता।इसी तरह ईर्ष्या और घृणा की भावनाएं हमारे मन की शांति को नष्ट कर देती है। इन भावनाओं के साथ हम जीवन में कभी सुखी नहीं सकते।भगवान बुद्ध का सबसे महत्वपूर्ण उपदेश यह है कि संसार में सुख और दुःख स्थायी नहीं होते। जीवन में इनका आना-जाना लगा रहता है। वे कहते है यदि आप अँधेरे में घिरे हो तो रोशनी की तलाश अवश्य करनी चाहिए। बीते हुए समय को याद नहीं करना चाहिए, अपितु अपने मन-मस्तिष्क को वर्तमान  पर केंद्रित करना चाहिए। भगवान बुद्ध ने दुनिया को शांति, सत्य, मानवता और समानता का उपदेश दिया।संयमित और सुखी जीवन के लिए यह अति आवश्यक है। इस बुद्ध पूर्णिमा पर सभी को बहुत-बहुत बधाई।
 

- प्रभाकर पुरंदरे

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