आर्थिक संकुचन की गहरी छाया वाला बजट !

भोपाल (महामीडिया) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को देश का बजट पेश किया। इस बजट से नौकरीपेशा लोगों को बहुत उम्मीदें थीं। उम्मीद की जा रही थी इस बार करीब 7 साल बात टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख से बढ़ाई जाएगी और साथ ही 80सी के तहत निवेश पर टैक्स छूट की सीमा को भी 1.5 लाख से बढ़ाया जाएगा। मगर ऐसा नहीं किया गया। मतलब सैलिरेड लोगों के लिए कुछ भी नहीं हुआ। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए प्रस्तुत बजट में एक बात साफ है कि बजट पर कोरोना संकट से उपजे आर्थिक संकुचन की गहरी छाया है।  इतना जरूर है कि संकट से सबक लेकर सरकार ने स्वास्थ्य बजट में अप्रत्याशित वृद्धि की है। हेल्थकेयर बजट 94,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.46 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। हालांकि यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस विशाल बजट राशि का इस्तेमाल किस तरह से और किन मदों में किया जाएगा। लेकिन यह बढ़ोतरी असाधारण है और इससे अंदाजा मिलता है कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र की जरूरतों को प्राथमिकता से ले रही है।
जिस तरह की असामान्य चुनौतियों के बीच यह बजट आया है, उसमें स्वाभाविक है कि सरकार ने बजट संबंधी पारंपरिक मानदंडों और कसौटियों को कुछ समय के लिए दरकिनार कर दिया है। इसी का परिणाम है कि साल 2021 में वित्त घाटा 9.5 फीसदी रहने का अनुमान होने के बावजूद जल्द से जल्द इसको नीचे लाने से ज्यादा जरूरी यह माना गया कि सरकारी खर्च बढ़ाकर विकास की गति को तेज किया जाए। बकौल प्रधानमंत्री बजट के दिल में गांव-किसान है। ऐसे वक्त में जब कृषि सुधार के विरोध के दौर में किसान गुस्से में हैं तो कृषि क्षेत्र में ध्यान देना जरूरी था। लेकिन ऐसा भी नहीं कि किसानों को छप्पर फाड़कर दिया गया हो। पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम में मिलने वाले पैसे को बढ़ाने की भी चर्चा थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस योजना का लाभ साढ़े ग्यारह करोड़ किसान उठा रहे हैं। बहरहाल, कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई कदम उठाये गये हैं।
वहीं दूसरी ओर आयकर छूट की आस लगाये बैठे मिडल क्लास को निराशा हाथ लगी क्योंकि न तो कोई अतिरिक्त टैक्स छूट दी गई और न ही टैक्स स्लैब में कोई बदलाव किया गया। हां, इतना जरूर है कि 75 साल से अधिक उम्र के लोगों को आयकर रिटर्न भरने में छूट दी गई है। लेकिन यह छूट सिर्फ पेंशन से होने वाली आय पर ही है।
वित्त मंत्री का अनुमान है कि आगामी वर्ष में वित्तीय घाटा 6.8 प्रतिशत होगा। अनुमान का आधार यह है कि अर्थव्यवस्था चल निकलेगी और विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये की रकम अर्जित हो जाएगी। बजट में एक सार्थक पक्ष बुनियादी संरचना के नगदीकरण का है। हाईवे, बिजली की ट्रांसमिशन लाइन, रेल लाइन, बंदरगाह, हवाई अड्डे इत्यादि जो सुचारू रूप से चल रहे हैं, उनका निजीकरण करके अथवा उन्हें निजी संचालकों को ठेके पर देकर रकम अर्जित करने का ऐलान वित्त मंत्री ने किया है।
रोजगार नीति को लेकर कुछ विशेष नहीं कहा गया है। न ही किसी रोडमैप का ही जिक्र है कि वित्तीय वर्ष में कितने रोजगार के अवसरों का सृजन किया जायेगा। दूसरी ओर मेट्रो के लिए ग्यारह हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं रेलवे के लिए एक बड़ी राशि 1,10,055 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसी तरह सड़क परिवहन मंत्रालय के लिए 1,18,101 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। 
कुल मिलाकर देखा जाए तो यह बजट इस आशा पर टिका हुआ है कि बुनियादी संरचना में निवेश से अर्थव्यवस्था की धुरी घूमने लगेगी और निजीकरण से पर्याप्त रकम मिल जाएगी। लेकिन दोनों ही बिंदुओं पर अनिश्चितता बनी हुई है। इसलिए अभी की स्थिति में निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता। खतरा टला नहीं है। शेयर बाजार के उछलने से उत्साहित नहीं होना चाहिए क्योंकि इसका वास्तविक अर्थव्यवस्था से संपर्क टूट गया सा लगता है।
 

- -प्रभाकर पुरंदरे

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