विश्व शांति के लिए खतरा बनता चीन !

लद्दाख की गलवन घाटी में चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों के साथ जो अमानवीय हरकत की उसके बाद पूरे देश में इस कपटी पडौसी देश के खिलाफ़ लोगों के मन में गुस्सा फुट रहा हैl  देश भर के शहरों में "मेड इन चाइना" उत्पादों का बहिष्कार होना स्वाभाविक हैl व्यापारीगण एकजुट होकर कसम खा रहे है कि वे चीनी सामान नहीं बेचेंगेl
दुनिया भर में कोरोना वायरस की फैलाने और आर्थिक मन्दी के लिए जिम्मेदर चीन को नसीहत देने का समय आ गया हैl
चीनी उत्पादों के बहिष्कार के अलावा भारत को कई मुद्दों पर उसकी विदेश नीति का भी विरोध करना चाहिएl चीन की कम्युनिस्ट सरकार अपने सैनिकों और आर्थिक ताक़त के दम पर दुनिया भर में दादगिरी कर रही हैl ब्रूनेई जैसे छोटे से देश से लेकर विश्व महाशक्ति अमेरिका तक को धमकाने का साहस कर रही हैl
वैसे भी पडौसी देशों की जमीनों पर अतिक्रमण कर उन पर कब्जा करना चीन का स्वभाव रहा हैl  यही कारण है कि तिब्बत, पूर्वी तुर्किस्तान  (शिंजियान्ग), दक्षिण मन्गोलिया, होंगकोन्ग, मकाऊ और ताइवान जैसे मुद्दों जब अंतरराष्ट्रीय मंच सवाल उठाए जाते हैं तो शी जिनपिंग की यह सरकार चुप्पी साध लेती हैl इसे वह " वन चाईना पालिसी" हिस्सा बताती हैl अब समय आ गया जब भारत को अपनी विदेश नीति में बदलाव लाना चाहिएl  इसमें कोई संदेह नहीं है कि 1949 में चीन में कम्युनिस्ट सरकार की स्थापना के बाद से ही भारत चीन की हां में हां मिलाता रहा हैl चीन यदि भारत की अखन्ड़ता का सम्मान करने के लिए तैयार नहीं है तो भारत को भी उसकी "वन चाईना पालिसी" का विरोध करना चाहिएl
देश की पुरानी सरकारों की कमजोर विदेश निति के कारण आज चीन तानशाह बनता जा रहा हैl छह दशक पूर्व यदि भारत ने तिब्बत में चीनी कब्जे का विरोध किया होता तो आज चीन इतनी हिम्मत नहीं दिखाताl लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में चीन केवल इसलिए तनकर
खडा है क्योंकि 1951 से वह तिब्बत पर अवैध कब्जा कर  भारत की सीमाओं तक आ पाहुंचा हैl चीन का इससे बडा दुस्साहस और क्या हो सकता है कि वह अरुणाचल प्रदेश को  तिब्बत का दक्षिनी हिस्सा बताकर उस पर दावा जताने लगता हैl
भारत को चाहिए कि गलवन घाटी में कुछ किलोमीटर जमीन के हिस्से की बजाय चीनी नेताओं के साथ कई मुद्दों पर एक साथ बात -चीत करेंl
गलवन घाटी में बीस भारतीय जवानों पर घात लगाकर हमला कर उनकी क्रूरतम हत्या करने की चीनी सैनिकों साजिश दोनों देशों रिश्तों पर गहरा असर डालेगीl
हाल ही में  बीएसएनएल द्वारा 4G टेंडर से चीनी कंपनी को बाहर रखा गयाl कानपुर से मुगलसराय बीच बनने वाले फ्रंट कोरीडोर प्रोजेक्ट से भी चीनी कंपनी को दूर रखा गयाl यह सराहनीय कदम हैl  इस अहंकारी पडौसी पता चलना चाहिए कि भारत के साथ छल-कपट करने उसे भी कीमत चुकानी पडेगीl
 

- प्रभाकर पुरंदरे

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