जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौती है

हमारे सामने उत्पन्न चुनौतियों में जलवायु परिवर्तन सबसे प्रमुख है। जलवायु परिवर्तन का असर पहले से ही दिखाई दे रहा है- जिससे तापमान बढ़ रहा  हैं, सूखे का सामना करना पढ़ रहा है और जंगलों में आग लगने की घटना अधिक होने लगी है, बारिश का पैटर्न भी बदल गया हैं, ग्लेशियर और बर्फ पिघल रहे हैं और वैश्विक स्तर पर समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है।   चरम मौसम के संदर्भ में, भारत के लिए 2019 वर्ष को याद रखा जाएगा। 2019 मौसम की एक समेकित रिपोर्ट जारी करते हुए, भारत के मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्वीकार किया है कि पिछले साल के दौरान भारत में 1500 से अधिक लोगों की मौत उच्च प्रभाव मौसम की घटनाएँ के कारण हुईं हैं ।

वर्ष 2019 के दौरान भारत के सभी हिस्सों में अत्यधिक भारी वर्षा, गर्मी और ठंड की लहरें, बर्फबारी, गर्ज के साथ तूफान, धूल भरी आंधी, बिजली और बाढ़ सहित अन्य प्रभावित मौसम की घटनाएं हुई । मीडिया और सरकारी रिपोर्टों के आधार पर, 2019 में बिहार सबसे अधिक प्रभावित होने वाला राज्य था, जहाँ चरम घटनाओं के कारण 650 से अधिक मौते दर्ज़ हुई ।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट और डाउन टू अर्थ द्वारा हाल ही में जारी गई स्टेट ऑफ इंडिया की पर्यावरण रिपोर्ट के अनुसार, 2018 और 2019 में भारत में लगभग हर महीने एक चरम मौसम की घटना हुई। मौतों के मामले में, (२०१८-१९) एशिया में भारत में 48% मौतें चरम मौसम की घटनाओं के कारण हुईं।

ग्लोबल वार्मिंग के परिणामस्वरूप बांग्लादेश जैसे देश समुद्र के बढ़ते स्तर से खतरे का सामना कर रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस सर्दियों में कम बर्फबारी का अनुभव किया, जबकि ऑस्ट्रेलिया में ग्रीष्म के मौसम में सामान्य से अधिक तापमान के साथ प्रचंड गर्मी का सामना किया । अमेरिका स्थित नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) की रिपोर्ट ने इस प्रवृत्ति की पुष्टि की है - यह जनवरी, 1880 के बाद सबसे गर्म महीना था।

ग्लोबल वार्मिंग को उत्सर्जन में वृद्धि का नतीजा कहा जाता है जो बदले में अर्थव्यवस्था से जुड़ी वस्तुओं और सेवाओं की खपत को बढ़ाने वाली ऊर्जा की मांग के साथ जुड़ा हुआ है जो कार्बन की तीव्रता को बढ़ाता है।  शोधकर्ताओं ने बताया है कि चरम मौसम की घटनाओं से पारिस्थितिकी तंत्र की कार्बन को अवशोषित करने की क्षमता कम हो सकती है और एक हानिकारक चक्र बन सकता है, जिसमें चरम मौसम जलवायु परिवर्तन को और बढ़ावा देंगे जो जंगलों को कार्बन को अवशोषित करने से रोकेगा।  जिससे यह बढ़ते-बढ़ते वातावरण में बना रहेगा। 

जलवायु परिवर्तन का सबसे बुरा पहलु यह है कि यह ज्यादातर मानव गतिविधि के कारण होता है, जैसा कि प्लास्टिक के उपयोग के मामले में है, हालांकि इस पर प्रतिबंध लगाने की बाद भी इसकी लगातार मांग बनी हुई  है। मनुष्य और प्रकृति अंतर-निर्भर हैं और सतत विकास के लिए सामंजस्य आवश्यक है। दुनिया भर के देशों ने उत्सर्जन में कटौती की आवश्यकता को स्वीकृति दी है।

- प्रभाकर पुरंदरे

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