विपदाएं अपने साथ अवसर भी लातीं हैं !

देश और दुनिया के कई हिस्सों में भय और चिन्ता का वातावरण बना हुआ है।  उद्योग और व्यापार ठप्प हो गए है। अनुदान रुक गए हैं । व्यक्ति  और संस्थान इस आर्थिक मंदी के चलते चिंता के दौर से गुजर रहे हैं । कोरोना वायरस की इस वैश्विक महामारी ने मानो हर- एक को झकझोर कर रख दिया है। हर-एक का चिंताग्रस्त होना स्वाभाविक भी है।
पांच सप्ताह पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी तब देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या मात्र 500 थी, आज जब अप्रैल माह ख़त्म होने जा रहा है तब कोरोना संक्रमित्तों का आंकड़ा 30,000 के पार जा चुका है। प्रधानमंत्री ने तब यदि देशव्यापी लॉकडाउन का उचित निर्णय नहीं लिया होता तो आज इस महामारी से पीड़ितों की संख्या एक लाख के पार हो गई होती। अच्छी खबर यह है कि हम अमेरिका जैसे सम्पन्न  और कई योरपीय देशों की तुलना में काफी बेहतर हालात में है। इससे भी अच्छी बात यह है कि विभिन्न भाषाओ और संस्कृतियों वाले इस देश ने दुनिया के सामने अपनी एक-जुटता का परिचय दिया।
मनुष्य के रूप में जन्म लेने के बाद हम कठिन परिस्थितियों से निपटने और गिरकर उठने के लिए बने होते है। सो कोविड-19 या  कोरोना वायरस की इस महामारी से भी हम उभर ही जाएंगे। बाज़ारो और उद्योगों की मंदी भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी। यद्यपि इसमें थोड़ा समय तो लगेगा ही। हालात जैसे 2010 से 2019 के बीच थे वैसे भले ही ना हो पर जीवन क़ी गाड़ी  पटरी पर जरूर आ जाएगी। बस, आवश्यकता है स्वयं को सावधान, सकारात्मक और ऊर्जावान बनाएं रखने की। स्वयं और परिवार को नकारात्मकता से दूर रखने की। इस कठिन परिस्थितियों में भी अवसरों को पहचानने की। याद रखिए, हर बुरा समय अपने साथ कुछ न कुछ अच्छे अवसर अवश्य लाता है। यह ना भूले कि महामारी और महंगाई के इस दौर ने हमें केवल मितव्ययी  बना दिया है, बल्कि हमारी जीवन शैली ही बदल दी है।   स्वास्थ्य के प्रति हम सब एकाएक अति जागरूक हो गए है।
अत: उम्मीद और सकारात्मक सोच कतई ना छोड़े। किसी भी तरह की नकारात्मक खबरों और विचारो को स्वयं और परिवार पर हावी ना होने दें। बेहतर से बेहतर की उम्मीद रखें , परंतु बुरे से बुरे हालात से लड़ने का हौंसला कायम रखें। इसके लिए सदैव तैयार रहें।
याद रखिए,  लॉकडाउन के इस दौर में सब कुछ लॉक डाउन नहीं हुआ है। आपकी क्रियाशीलता को किसी ने लॉकडाउन नहीं किया हैं। जो लोग अक्सर समय नहीं होने की शिकायत करते है, आज उनके पास समय ही समय है। इस समय का सदुपयोग करें। जीवन में अधूरे रह गए शौकों को जागृत कर अपनी क्रियाशीलता को पुनर्जीवित करें। गायन, संगीत, पाक-कला, पठन,-पाठन, योग और ध्यान में मन और समय लगाए, ताकि स्वयं और परिवार के आस-पास सदैव सकारात्मक आभा मंडल बना रहे।
हर विपत्ति काल अपने साथ अच्छे अवसर भी लाता है। इन अवसरों को पहचाने और जीवन को निरोगी  व सफल बनाएं।
 

- प्रभाकर पुरंदरे

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