बौखलाए चीन की नापाक हरकत !

लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच पिछले एक माह से चल रहे टकराव ने मंगलवार देर रात हिंसक रूप ले लिया। भारतीय सेना के मुताबिक, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ झड़प में भारत के कमांडिंग अधिकारी (कर्नल) समेत 20 जवान शहीद हो गए। वहीं, जवाबी कार्रवाई में 43 चीनी सैनिक मारे गए और कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सैनिकों के बीच पथराव हुआ। लोहे की राडो से एक-दूसरे पर हमला किया गया।  गलवान घाटी लद्दाख और अक्साई चीन के बीच भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित है। यहां पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) अक्साई चिन को भारत से अलग करती है। चीन यहां पहले ही जरूरी सैन्य निर्माण कर चुका है और अब वो मौजूदा स्थिति बनाए रखने की बात करता है। वहीं, अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अब भारत भी वहां पर सामरिक निर्माण करना चाहता है। इसी को लेकर दोनों देशों में विवाद है। चीन ने सीमा पर एकतरफा तरीके से यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया। इसकी वजह से हिंसक आमना-सामना हुआ। भारत ने हमेशा गतिविधि एलएसी के भीतर की है। 
दरअसल. चीन स्वयं को दुनिया में एक सशक्त और एकजुट राष्ट्र के रूप में दिखाने का झूठा प्रयास कर राहा हैl जबकि उसकी वास्तविकता कुछ और हैl सच्चाई यह है कि चीन बिखरता जा रहा है। नेता एक दूसरे के खिलाफ हैं और देश को एकजुट रखना मुश्किल हो रहा है। कोरोना वायरस के कारण चीन में 6 से 10 करोड़ लोगों की नौकरी जा चुकी है। आज चीन में बेरोजगारी का स्तर 15 फीसदी पर पहुंच गया है, जबकि राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अनुमान था कि यह महज 5.5 फीसदी रहेगा। चीन में सभी सेक्टर्स में हालत खराब है।
खबर यह है कि चीन के शी जिनपिंग अपने ही देश में और अपनी ही पार्टी में कमजोर पड़ते जा रहे हैं और खुद को मजबूत नेता साबित करने के लिए उनके इशारे पर बीती रात सेना ने भारत सीमा में घुसने की कोशिश की, लेकिन भारत ने तगड़ा जवाब दिया तो दांव उल्टा पड़ गया। चीन को अपने 43 सैनिकों से हाथ धोना पड़ गया। लेकिन चीन का पक्षपाती मीडिया इसका जिक्र तक नहीं कर रहा हैl
चीन इसलिए भी नाराज है, क्योंकि भारत और अमेरिका हाल के वर्षों में काफी करीब आए हैं। बीजिंग को लगता है कि उसके आंतरिक उथल-पुथल और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का भारत फायदा उठाना चाहता है। हमें उसकी यह गलतफाहमी दूर करना होगी। उसे यह एहसास दिलाना होगा कि अमेरिका या अन्य देशों से बेहतर संबंध हमारी जरूरत हैं। अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल न करना भारत की बुनियादी रणनीति रही है, और आगे भी वह इसी नीति पर अमल करता रहेगा। चीन के साथ जमीन विवाद पर भारत को तटस्थ रहना चाहिएl  चीन को सीमा पर यथास्थिति बनानी ही होगीl जब तक वह ऐसा नहीं करता उसकी कोई बात नहीं मानी जाएl इसके पूर्व भी चीन ने सीमा पर कई बार उल्लंघन किया हैl  चीन को यह भली-भान्ति समझना चाहिए कि यह 1962 का भारत नहीं. बल्कि 2020 का हिन्दुस्तान है और हर तरह से सक्षम हैl

- प्रभाकर पुरंदरे

अन्य संपादकीय