लॉकडाउन का चौथा चरण और चुनोतियां . . !

जैसा कि आपेक्षित था, लॉकडाउन का चौथा चरण लागू हो गया है और यह 31 मई तक चलेगा। देश भर में कोरोना संक्रमण की भयावह स्थिति को देखते हुए लॉकडाउन का बढ़ना स्वाभाविक ही था। 25 मार्च को प्रधानमंत्री ने जब पहले लॉकडाउन की घोषणा की थी, तब देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या मात्र 500 के अस-पास थी। तमाम सख्त उपायों के बावजूद लॉक डाउन के तीसरे चरण की समाप्ति के बाद और चौथे  चरण की शुरआत के पहले दिन तक देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या चोंकाने वाले एक लाख के आंकड़े को छू रही है।राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मिले आंकड़ों के मुताबिक देश में रविवार को कोरोना संक्रानितों का आंकड़ा 95,389 पर पहुंच गया है। अब तक इस महामारी से करीब तीन हजार (2,949 ) लोगों की जा जाने जा चुकी हैं।लॉकडाउन के चोथे चरणं में रेड, ऑरेन्ज, ग्रीन जोन का निर्धारण करने का अधिकार राज्यों को दिया रहा है। चूंकि यह कई राज्यों की मांग थी, अब उन्हें इस अधिकार का उपयोग इस तरह करना होगा जिससे संक्रमण पर भी लगाम लगे और कारोबार एवं आवाजाही की गतिविधियां भी बनी रहे। इसी से कोरोना के संग जीने का माहौल बनेगा। यह राज्य सरकारों के लिए मुश्किल रास्ता अवश्य होगा। लेकिन इसके आलावा कोई और विकल्प भी नहीं हैं।खतरा इसलिए भी है क्योंकि लाखों की संख्या में श्रमिक एक राज्य से दूसरे राज्य में आ रहे है।  साथ ही चोथे चरण में कई तरह की छूट के कारण और कामकाज के कारण सड़कों पर लोगों की आवाजाही बढ़ेगी।आवागमन को छूट देना भी जरूरी है क्योंकि इसके बगैर आर्थिक और व्यापारिक हलचल होना असंभव है। इस माहौल के निर्माण में आम लोगों की भूमिका भी खास होगी। लोगों को यह ध्यान देना होगा कि इस चौथे चारण में तमाम तरह की छूट मिलने के साथ ही एक-दूसरे से सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की आवश्यकता और बढ़ गई है।आज की जरूरत यही है कि कारोबारी और औद्योगिक गतिविधियां तेज हो। संकट में फंसी अर्थ-व्यवस्था के लिए ये कदम जरुरी हैं।
 

- प्रभाकर पुरंदरे

अन्य संपादकीय