लापरवाही की गैस त्रासदी !

आँध्रप्रदेश क़े विशाखापट्टनम स्थित दक्षिण कोरियाई  केमिकल फैक्टरी - एलजी पोलिमेर्स में गुरुवार तड़के  स्टाइरीन गैस के रिसाव से हुए हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई। करीब 300 से ज्यादा बुरी तरह से प्रभावित हुए। इनमें से 10 लोग तो अब वेंटीलेटर सहारे है। चालीस दिन  क़े बाद लॉकडाउन के बाद यह फैक्टरी गुरुवार को फिर से शुरू होनी थी। पहले ही दिन हुए हादसे ने सबको हिला कर रख दिया। प्रथमदृष्ट्या यह हादसा लापरवाही की वजह से होना बताया जाता है। प्लांट की रेफ्रिजरेशन यूनिट में गड़बड़ी से गैस का रिसाव हुआ। और तो और रिसाव के बाद फैक्टरी का आपात सायरन भी नहीं बजा। परिणामस्वरूप प्लांट क़े आस-पास स्थित पांच गावों क़े लोगों में आँखों में जलन, साँस लेने में परेशानी, उलटी और त्वचा की बीमारी होने लगी।
ऐसा लगता है जैसे दुनियभर में बदनाम "भोपाल गैस हादसे' के  तीन दशक बाद भी हमने अभी तक कोई सबक नहीं लिय है। क्या इन कंपनियों में काम करने
वाले हमारे मजदूरों, कर्मचारियों और आस-पास रहने वाले लोगों की जिंदगियां इतनी सस्ती है कि ये विदेशी कंपनियां सुरक्षा मापदंडों की सहज अनदेखी करती है? क्या इन कंपनियों में काम करने वाले हमारे कर्मचारी तकनिकी रूप से सक्षम नहीं होते है?  क्या हमारा भ्रष्ट सरकारी तंत्र इनके सुरक्षा मापदंडों की जान-बूझकर अनदेखी करता है?
एलजी पोलिमेर्स कोई ऐसी-वैसी नहीं, बल्कि दुनिया की जानी-मानी कंपनी है। दुनियाभर में इसके ढाई करोड़ से ज्यादा एम्प्लाइज हैं। साल में यह कंपनी करीब 10 लाख करोड़ का व्यवसाय करती है। पिछले साल ही यानि 2019 में इसे 1.83 करोड़ का लाभ हुआ था। केवल इतना ही नहीं, इसके आर एन्ड डी विभाग में ही 57,00 एम्प्लाइज हैँ।
विशाखापट्टनम स्थित प्लांट को एलजी पोलिमेर्स ने 1977 में विजय माल्या से ख़रीदा था। इससे पहले यह  " हिंदुस्तान पोलिमेर्स" के नाम से मशहूर था और इसकी स्थापना 1970 में हुई थी।
एलजी पोलिमेर्स में पोलिस्टाइरीन बनाया जाता है जो फ़ूड-सर्विस इंडस्ट्री में ट्रे, डिस्पोजल बर्तन, प्ले वगैराह बनाने क़े काम आता है।
आँध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए देने की घोषणा की। वेंटीलेटर पर रखे लोगों को 10-10 लाख और अस्पताल में भर्ती लोगों को एक-एक लाख रुपए देने की भी घोषणा की। लेकिन सवाल यह है कि हम ऐसी घटनाओं से कब लेंगे?

- प्रभाकर पुरंदरे

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