गुरु पूर्णिमा का महत्व

गुरुब्रह्मा गुरुविर्ष्णुः, गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः।।
अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है, गुरु ही भगवान शिव है। गुरु ही साक्षात परम ब्रहम है। ऐसे गुरु के चरणों में मैं प्रणाम करता हूँ। संस्कृत में ‘गुरु’ शब्द का अर्थ है ‘अंधकार को मिटाने वाला।’ गुरु साधक के अज्ञान को मिटाता है, ताकि वह अपने भीतर ही सृष्टि के स्रोत का अनुभव कर सके। पारंपरिक रूप से गुरु पूर्णिमा का दिन वह समय है जब साधक गुरु को अपना आभार अर्पित करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। योग साधना और ध्यान का अभ्यास करने के लिए गुरु पूर्णिमा को विशेष लाभ देने वाला दिन माना जाता है।
हिंदू धर्म में गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा प्राप्त है क्योंकि गुरु ही ज्ञान देते हैं और स्वयं भगवान ने भी धरती पर अवतार लेते हुए अपने गुरुओं की चरण वंदना की है।  सनातन संस्कृति में गुरु का काफी महिमामंडन किया गया है। गुरु की कृपा से ज्ञान प्राप्त होता है और उनके आशीर्वाद से सभी सुख-सुविधाओं, बुद्धिबल और एश्वर्य की प्राप्ति होती है।
गुरु पूर्णिमा का पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ (जून- जुलाई) के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को  मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 5 जुलाई 2020 को मनाया जा रहा हैl इस दिन गुरुओं, शिक्षकों की पूजा और सम्मान किया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में लोग गुरु से दीक्षा भी ग्रहण करते हैं। कोरोना वायरस के कारण आयोजनों पर लगी रोक की वजह से संभवतः इस दिन कोई बड़े आयोजन ना हो सकें लेकिन आप अपने गुरू की वंदना कर ही सकते हैंl
यह पर्व वर्षा ऋतु की शुरुवात में मनाया जाता है। मौसम बहुत ही सुखद होता है, न बहुत गर्मी होती है न बहुत सर्दी। गुरु पूर्णिमा को व्‍यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी का अवतरण हुआ था। उन्होने चारों वेदों की रचना भी की थी इसलिए उन्हें “वेद व्यास” के नाम से पुकारा जाता है।  सनातन संस्कृति के अठारह पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। उन्होंने ने ही वेदों की रचना कर उनको अठारह भागों में विभक्त किया था। महर्षि वेद व्यास को आदि गुरु भी कहा जाता है।
आज के भागदौड़ भरे भौतिकतावादी समाज में हमे गुरु ही जरूरत बहुत अधिक है। गुरु का महत्व सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि व्यापक अर्थ में देखने को मिलता है। अब तो आध्यात्मिक शांति के लिए अनेक लोग किसी न किसी गुरु की शरण में चले जाते हैं। धन, सम्पत्ति और भौतिक साधन जुटाने में आज लोग अंधे हो गए हैं। यही वजह है लोगों की जिन्दगी में तनाव भर गया है। छोटी छोटी बातों पर लोग एक दूसरे को जान से मारने को तैयार हो जाते हैं, लोगों के जीवन में आध्यात्मिक शांति नही हैl
हर भटके हुए व्यक्ति को सही मार्ग दिखाने का काम “गुरु” की करता है।  गुरु का आशीर्वाद सबके लिए कल्याणकारी व ज्ञानवर्द्धक होता है, इसलिए इस दिन गुरु पूजन के उपरांत गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिएl ध्यान और योग में मन लगाए और गुरु के बताए मार्ग पर चलें तभी मन को शांति मिलेगीl

- प्रभाकर पुरंदरे

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