घरेलू हिंसा की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय !

कोरोना वायरस की वैश्विक व्महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के  दौरान घरेलू हिंसा की घटनाओं में अचानक बढ़ोत्तरी देखी गई है। लॉकडाउन क़े इस दौर में विशेषकर कई पुरुषों क़े व्यवहार में यकायक बदलाव सा पाया गया। मनोवैज्ञानिकों की माने तो पुरुषों में भय, अनिश्चितता और निराशा के कारण आक्रामकता देखी जा रही है। नशे आदि के शौकीन लोगों को काफी दिनों तक शराब न मिलना, पैसों की तंगी, नौकरी खोने का डर, "वर्क फ्रॉम होम" के तहत घर ज्यादा काम या टारगेट पूरा करने का दबाव आदि इसके कारण हो सकते है। लेकिन इन सबका शिकार घर की महिला यानि पत्नी और बच्चे ही हो रहे हैं। यही कारण है कि पति द्वारा प्रताड़ित किए जा जाने, मार-पीट या बुरा व्यवहार किए जाने की महिलाओं की शिकायतें एकाएक बढ़ गई हैं।
इसमें कोई संदेह नहीं कि लॉकडाउन का यह लंबा पीरियड घरेलू महिलाओ के लिए मानो एक  दोहरा संकट बन कर आया है। एक तो पति और बच्चों क़े दिनभर घर रहने के कारण घर के काम का बोझ बढ़ गया है। दूसरा, कामवाली बाई या मैड के नहीं आने के कारण यह वर्कलोड भी उसे ही सहन करना पड़ रहा है।
घरेलु हिंसा की बढ़ती घटनाएं नि:संदेह चिंता का विषय है। इन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। जो यह सोचते हैं कि, "ऐसा तो होता है" या "यह तो परिवार का  निजी मामला है", उन्हें  अपना दृष्टिकोण बदलना ही होगा।
विशेषज्ञो की माने तो इन घटनाओं के अचानक बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। जैसे--  दो पार्टनर्स में से किसी एक को "सदैव वर्चस्व दर्शाने वाले" पार्टनर के साथ ज्यादा समय घर पर रहना पड़ रहा हो, शराब आदि के शौकीन  पुरुष अपनी निराशा को नहीं दबा पा रहे हो, या धन की कमी या हानि के कारण चिंता या अवसाद का बढ़ना इसके प्रमुक कारण हैं। यह विश्व क़े उन सब देशों में हो रहा है जहाँ कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन चल रहा है।
यूनाइटेड नेशन पापुलेशन फंड के जारी नए डाटा के मुताबिक संघ के 197 सदस्य देशों में लॉकडाउन की इस अवधि में घरेलू हिंसा की घटनाओं में 20 प्रतिशत वृद्धि हुई है। जहां तक भारत का सवाल है, यहां भी यह चिंता गंभीर स्वरूप लेती जा रही है।
राष्ट्रीय महिला आयोग (एन सी डब्लू) ने हाल ही में व्हाटसअप के सहयोग से घरेलू हिंसा की शिकायतों को दर्ज कराने का जिम्मा उठाया है। मार्च से अब तक यहां 400 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। नेशनल फॅमिली हैल्थ सर्वे के अनुसार केवल पंजाब में ही घरेलू हिंसा के 700 से ज्यादा मामले दर्ज हूए हैं। एक सर्वे के अनुसार 42 प्रतिशत पुरुष तो महिलाओं पर हाथ उठाने को गलत नहीं मानते। जिस देश में नारी को सदा सम्मानीय माना जाता हो, वहां यह सब होना शर्मनाक है।
प्रिय पुरुषों, यह कठिन दौर हमेशा तो नहीं रहेगा। हम सब जानते हैं अच्छा या बुरा समय तो आता-जाता रहता है। परिवार यानि पत्नी और बच्चे ही आपकी मूल शक्ति है। ये ही आपके सच्चे हित-चिंतक हैं। समय कितना भी ख़राब क्यों ना हो, आपका परिवार ही सदा आपके साथ खड़ा रहेगा। यह ऐसा समय है जब घर के कर्ता पुरुष को संयम और शांति से काम लेना चाहिए। अपने भीतर दबे सच्चे "हीरो" या "वारियर" को जगाने का यही सही समय है। यही समय है अपने परिवार को दिखने का कि आप उनके  "रीयल हीरो" हो।

- प्रभाकर पुरंदरे

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