कोविड-19 का प्रकोप एक चेतावनी है

कोविड-19 वायरस अब महामारी का रूप लेने लगा है।  जैसे-जैसे दुनियाभर में लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है, सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के माध्यम से इससे जानलेवा वायरस से खुद को बचाने के लिए अवैज्ञानिक और अविश्वसनीय सलाह लेने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई हैं।  कोरोना वायरस का प्रकोप अब एक वैश्विक चिंता का सबब बन गया है। विश्व स्तर पर, लगभग 88,000 मामलों का पता लगाया गया है, जिनमें से अधिकांश चीन में हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मरने वालों की संख्या 3000 से अधिक हो गई है। चीन में केंद्र सरकार ने इस वायरस का मुकाबला करने की दिशा में कई सार्थक प्रयास किए हैं - इसमें हुबेई प्रांत के वुहान क्षेत्र में पूरी तरह से लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है, जहां से वायरस की उत्पत्ति हुई थी। यह एक बहुत बडा फैसला था क्योंकि वुहान मध्य चीन का सबसे बड़ा शहर है जिसकी आबादी लगभग 9 मिलियन है।

सोमवार (2 मार्च) को नई दिल्ली में कोरोनोवायरस पर अपनी विशेष ब्रीफिंग में, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री-हर्षवर्धन ने कहा कि एक डॉक्टर के रूप में, उन्हें नहीं लगता  कि इस संक्रमण को दूर रखने के लिए किसी मास्क को पहनने की कोई आवश्यकता है; खांसते समय बुनियादी शिष्टाचार और बुनियादी स्वच्छता का ख्याल रखना ही पर्याप्त हैं

हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को अपने मुंह और नाक पर सर्जिकल मास्क पहनने की सलाह दी हैं 

रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र संयुक्त राज्य अमेरिका (सीडीसी) का भी कहना है कि ऐसे मास्क जिन्हें तकनीकी रूप से N95s के नाम से जाना जाता है - जो मोटे होते है, और जो मुंह और नाक को अच्छी तरह मज़बूती से फिट बैठते हैं। यह  साधारण सर्जिकल मास्क की अपेक्षाछोटे कणों को भी ज्यादा प्रभावी ढंग से रोकने करने में सक्षम होते हैंइसलिए इसे ही पहनना चाहिए।

हालांकि, यह सलाह स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए है, और उनके लिए जिनको खांसी या सर्दी है - चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा है कि सामान्य स्वस्थ लोगों  के लिए यह आम तौर पर प्रभावी नहीं हैं। सामान्य लोगों को तो फेस मास्क खरीदना चाहिए क्योंकि  नोवेल कोरोनावायरस "हवा में" होता है, और सलाह उनके लिए भी नहीं जिनके पास पहले से ही घर पर मास्क रखे हैं, पर उन्हें भी उसे पहनने से पहले अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। इस सलाह में तब भी कोई बदलाव नहीं आता अगर किसी विशेष समुदाय में कोविड-19 के मामले हों।

सरल निवारक आदतें जैसे कि कई बार हाथ धोना और उसे चेहरे, नाक और आंखों से दूर रखना और बाकी समय में संचार मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को

बड़े पैमाने पर जागरूक करने की आवश्यकता है। 80% से अधिक संक्रमित लोगो में केवल हल्के लक्षण ही देखे गए हैं, जैसे कि बुखार और खांसी। केवल 100 में से लगभग 1 व्यक्ति की ही मौत होती है।  इसमें भी वे लोग जो आमतौर पर उम्रदराज होते हैं और जिनको पहले से ही कोई स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं रही हो, जैसे हृदय रोग या मधुमेह। 9 साल से कम उम्र के बच्चों की कोई मौत नहीं हुई है। भारत को अपने स्थानीय स्वशासन और एनजीओ सेक्टर की ताकत को और मजबूत करना होगा

- प्रभाकर पुरंदरे

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