महेंद्र सिंह धोनी: जिन्हें भारतीय क्रिकेट में उनकी विरासत के तौर पर देखा जाएगा

 भोपाल [ महामीडिया] दुनिया के सबसे सफल कप्तानों में शामिल महेंद्र सिंह धोनी ने शनिवार को इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरों में बुनी गजल ‘मैं पल दो पल का शायर हूं’ का वीडियो पोस्ट कर रिटायरमेंट का ऐलान किया। उन्होंने लिखा- आप लोगों की तरफ से हमेशा मिले प्यार और सपोर्ट के लिए शुक्रिया। आज शाम 7 बजकर 29 मिनट के बाद से मुझे रिटायर ही समझें। धोनी ने अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच पिछले साल वर्ल्ड कप में खेला था। तब टीम सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से हार गई थी। उस मैच में धोनी ने अर्धशतक लगाया था। वे भारत के सबसे कामयाब कप्तान रहे हैं। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने 2007 में टी-20 और 2011 में वनडे वर्ल्ड कप जीता था। दो साल बाद चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब जीतकर वे आईसीसी की तीन ट्रॉफी जीतने वाले दुनिया के पहले कप्तान बने थे।
भारतीय क्रिकेट में जितना आकर्षक उनका पदार्पण था, उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहना भी उतना ही यादगार रहेगा। पहले हम अनेक दिग्गज खिलाड़ियों को बहुत मुश्किल से क्रिकेट छोड़ते देखते रहे हैं, लेकिन धौनी जिस सहजता से डटे हुए थे, लगभग उतनी ही सहजता से वह अपने आप विदा हुए हैं।
भारतीय क्रिकेट को विजय मर्चेंट, सुनील गावस्कर, कपिल देव, राहुल ड्रविड, सौरव गांगुली,  सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज मिले हैं, पर हम धोनी की बात करें, तो वह इन सबसे हटकर हैं।  उनके आने से न केवल दिशा बदली, बल्कि भारतीय क्रिकेट की चमक और धमक भी बढ़ी। यह इतिहास में दर्ज है कि धौनी के नेतृत्व में जब टी-20 क्रिकेट में जीत हासिल हुई, तब भारत में आईपीएल क्रिकेट संभव हुआ, जिससे दुनिया के सैंकड़ों नए-पुराने खिलाड़ियों को पहले से बहुत बेहतर जिंदगी नसीब हुई। 
पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक भी महेंद्र सिंह धोनी के इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट लेने के फैसले से मायूस हैं। उनका मानना है कि धोनी जैसे बड़े कद के खिलाड़ी को घर से नहीं, बल्कि मैदान से रिटायरमेंट का ऐलान करना चाहिए था। इंजमाम ने अपने यू-ट्यूब चैनल पर पोस्ट किए वीडियो में यह बातें कहीं। इंजमाम ने कहा कि मैंने एक बार सचिन तेंदुलकर को भी यही सलाह दी थी कि जब आपके इतनी बड़ी फैन फॉलोइंग है, तो आपको मैदान से अपने क्रिकेट सफर को खत्म करना चाहिए। क्योंकि यहीं से आपने इज्जत और स्टारडम हासिल किया है। धोनी को भी ऐसा ही करना चाहिए था। इससे उनके फैंस और मुझे भी बहुत खुशी होती।
यूं तो धोनी की उपलब्धियों से हर कोई वाकिफ है, लेकिन करीब डेढ़ दशक के करिअर में पर्दे के पीछे भी धोनी ने ऐसे काम किए, जिन्हें भारतीय क्रिकेट में उनकी विरासत के तौर पर देखा जाएगा। वह आईसीसी की तीनों चैंपियनशिप जीतने वाले दुनिया के इकलौते कप्तान हैं।  वह विकेट के पीछे जो जगह छोड़ गए हैं, वहां उनकी नामौजूदगी न जाने कितने वर्षों तक खलेगी। 

- प्रभाकर पुरंदरे

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