नई स्कूल बैग नीति स्वागत योग्य है

भोपाल (महामीडिया) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को देश भर में लागू किये जाने के लिए उठाये जा रहे कदमों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा हाल ही में  ‘पॉलिसी ऑन स्कूल बैग 2020’ डॉक्यूमेंट जारी किया गया है। मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा और सारक्षता विभाग द्वारा तैयार इस डॉक्यूमेंट में स्कूलों के विभिन्न कक्षाओं के स्टूडेंट्स के लिए स्कूल बैक के अधिकतम वजन से लेकर कक्षाओं में ही सिलेबस के अधिकतम हिस्से को कवर करने और होमवर्क दिये जाने को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिये गये हैं। मंत्रालय द्वारा 3 दिसंबर 2020 को जारी ‘स्कूल बैग पॉलिसी 2020’ डॉक्यूमेंट के अनुसार स्कूलों में दूसरी कक्षा तक के स्टूडेंट्स के लिए कोई भी होमवर्क न दिये जाने का प्रावधान किया गया है।
नई स्कूल बैग नीति के तहत कक्षा 1 से 10वीं तक के छात्रों के स्कूल बैग का भार उनके शरीर के वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इसी तरह होमवर्क की समय सीमा भी कक्षा वार तय की गई है। ख़ुशी की बात यह है की  बच्चों के होमवर्क की समय सीमा भी तय की गई हैI केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए शैक्षणिक सत्र से इन फैसलों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है  i  नई नीति के तहत कक्षा दूसरी तक के विद्यार्थियों को होमवर्क नहीं दिया जाएगा। कक्षा 3 से 6 के लिए साप्ताहिक 2 घंटे तक का होमवर्क, कक्षा 6 से 8 के लिए प्रतिदिन 1 घंटे का होमवर्क और कक्षा 9 से 12 के लिए अधिकतम 2 घंटे का होमवर्क सीमित होना चाहिए। बच्चों के बस्ते का वजन चेक करने के लिए स्कूलों में तौल मशीन रखी जाएगी और नियमित आधार पर स्कूल के बैग के वजन की निगरानी करनी होगी। प्रकाशकों को किताबों के पीछे उसका वजन भी छापना होगा। पहली कक्षा के छात्रों के लिए कुल तीन किताबें होंगी, जिनका वजन 1,078 ग्राम तक होगा। बारहवीं में पढ़ने वाले छात्रों के लिए कुल छह किताबें होगी, जिनका वजन 4,182 ग्राम तक ही होगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए शैक्षणिक सत्र से इन फैसलों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।
स्कूल भले ही बंद हों, लेकिन स्कूली बच्चों को भारी बस्ते से मुक्ति दिलाने के लिए चल रहे प्रयास न केवल सुखद, बल्कि स्वागत के योग्य भी हैं। दरअसल, वर्षों से बच्चों को स्कूली बैग के बोझ से मुक्ति दिलाने की चर्चा चल रही थी। भारी या हल्के स्कूल बैग कातइ इस बात के संकेत नहीं हैं कि बच्चा पढ़ाकू है या उसके स्कूल में अच्छी या खराब पढ़ाई होती है। दरअसल, पिछले कुछ दशकों में कई स्कूलों में दिखावेपन की होड़-सी लग गई थी। अनेक अध्ययनों ने हमें बताया है कि भारी बैग कूबड़ और रीढ़ संबंधी अन्य समस्याओं को पैदा कर रहे हैं। जब बच्चों के बढ़ने या लंबे होने की उम्र होती है, तब उन पर जरूरत से ज्यादा बोझ लादना खतरे से खाली नहीं है।
कोई शक नहीं, स्कूल में जितने पीरियड नहीं होते, उनसे ज्यादा किताबें, कॉपियां मंगाने को बहुत कम ही लोग गंभीरता से ले रहे थे I अब जब केंद्र सरकार ने तमाम राज्य सरकारों को परिपत्र जारी कर दिया है, तब राज्यों को अपने स्तर पर बच्चों के बैग को हल्का कराने की तैयारी कर लेनी चाहिए। कुछ जगह इसकी शुरुआत सरकारी स्कूलों से भी करनी पड़ सकती है, लेकिन विशेष रूप से निजी स्कूलों को पाबंद करना पडे़गा। उन्हें समझाना होगा कि वे अपनी समय सारिणी सुधारें, केवल उन्हीं किताबों और कॉपियों को स्कूल मंगवाएं, जिनकी जरूरत है। इसके साथ ही, बच्चों के पाठ्यक्रम को हल्का करने की चर्चा भी हो रही है, तो स्कूलों में पीरियड की संख्या घटाने पर भी विचार करना चाहिए।
 

- -- प्रभाकर पुरंदरे

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