ऊं गं गणपतेय नम:

भोपाल (महामीडिया) साल भर के इंतजार के बाद एक बार फिर गणपति बप्पा घर-घर पधारने की तैयारी में हैं। इस बार गणेश चतुर्थी 22 अगस्त, शनिवार को मनाई जा रही है। मान्यताओं के अनुसार भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेशजी का जन्म हुआ था, इस उपलक्ष्य में हर साल गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। घर -घर गणेशजी की प्रतिमाओं की स्थापना की जाती हैl गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। 10 दिनों तक स्थापना के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन गणेशजी को विर्सजित किया जाता है। पर्यावरण और प्रकृति की रक्षा के लिए मिट्टी से बने गणेशजी की मूर्तियों को ही घरों में स्थापित किया जाना चाहिएl
कुछ लोग गोबर से निर्मित गणेश  प्रतिमाओं की भी स्थापना घरों में करते हैंl गोबर से बनी गणेश प्रतिमा सबसे शुद्ध मानी हैl यह सभी प्रतिमाएं विशुद्ध रूप से जैविक पदार्थों से बनाई जा रही हैं। इसमें गोंद, गाय का गोबर इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं शास्त्रों में बताया गया है कि गाय के गोबर में लक्ष्मीजी का वास होता है। गोबर के गणेशजी को घर में विराजमान करने से लक्ष्मीजी का वास घर में होता है। गोबर या मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को हम घर के अंदर किसी गमले आदि में भी विसर्जित कर सकते हैं। इससे गमलों में भी खाद मिलेगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। ऐसी भी मान्यता है कि भाद्रपद मास की चतुर्थी को जिस प्रतिमा की स्थापना की जाती है उसका अनन्त चतुर्शी तक विसर्जन कर देना चाहिए।
भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है। वे भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं। यदि कोई भक्त श्रीगणेश का श्रद्धा और भक्ति के साथ सिर्फ नाम भी ले लेता है तो उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। गणेशजी की विधिपूर्वक आराधना कर उनकी प्रिय वस्तुएं समर्पित करने से भक्तों को मनवांछित फल प्राप्त होता है।
श्रीगणेश की पूजा में उनकी सूंड किस दिशा में है इसका भी बड़ा महत्व है। मान्यता है कि घर में बाईं सूंड वाले गणेशजी की स्थापना करना चाहिए। इस तरह के गणेशजी की स्थापना करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैंI इसलिए गृहस्थों को बाईं सूंड वाले गणेशजी की उपासना करना चाहिए। मोदक गणेशजी को बहुत प्रिय है और इसका भोग लगाने से वे भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं। हरी दुर्वा घास और बूंदी के लड्डू गणेशजी को बहुत प्रिय है। ऐसी मान्यता है कि हरी दुर्वा उनको शीतलता प्रदान करती है। बूंदी के लड्डू का भोग लगाने से गणपतिजी अपने भक्तों को धन-समृद्धि का वरदान देते हैं। गणेशजी की पूजा के साथ पत्नी रिद्धि और सिद्धि और पुत्र शुभ और लाभ की पूजा करना चाहिए। पूजास्थल पर चूहे को भी स्थान देने से गणेशजी भक्तों पर प्रसन्न होते हैं।
शास्त्रों के अनुसार श्रीगणेश के सबसे पहले दर्शन करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं और उनके शरीर पर ब्रह्माण्ड के सभी अंग निवास करते हैंl शास्त्रों में गणेशजी की पीठ के दर्शन करने का निषेध बताया गया है। गणेशजी की पीठ में दरिद्रता का वास होता है, इसलिए गणपतिजी की पीठ के दर्शन नहीं करना चाहिए।
कोरोना महामारी के इस संकटकाल में कालोनी या मंदिरों में गणेश पूजा या आरती में शामिल होते समय सामाजिक दूरी का विशेष ध्यान रखेंl मास्क लगाये रहें और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करेंl आप सभी को गणेश उत्सव की बहुत-बहुत शुभकामनायें!
 

- प्रभाकर पुरंदरे

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