ऊं नमो भगवते वासुदेवाय !

भोपाल (महामीडिया) भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान गायक पंडित जसराज का 90 वर्ष की आयु में अमेरिका के न्यू जर्सी में निधन हो गयाI "ऊं नमो भगवते वासुदेवाय.  " और  " गोविंद दामोदर.. ." जैसी कालजयी रचनायें गाने वाले जसराज जी के निधन से संगीत जगत में सन्नाटा पसर गया है l पंडितजी का जन्म 28 जनवरी 1930 को एक ऐसे परिवार में हुआ, जिसकी चार पीढ़ियां भारतीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित थीं। पिता पंडित मोतीराम मेवाती घराने के संगीतज्ञ थे। मेवाती घराने की शुरुआत 19वीं सदी के अंत में जोधपुर के उस्ताद घग्घे नजीर खान ने की थी। उन्होंने अपनी संगीत की शिक्षा पंडित नत्थूलाल और पंडित चिमनलाल को दी। पंडित नत्थू लाल ने अपने संस्कार पंडित मोतीराम यानी जसराज जी  के  पिता को दिए और इस तरह मेवाती घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत के नामी घराने में शुमार हुआ।
अपने आठ दशक से अधिक के संगीतमय सफर में पंडित जसराज को पद्म विभूषण (2000) , पद्म भूषण (1990) और पद्मश्री (1975) जैसे सम्मान मिले । पिछले साल सितंबर में सौरमंडल में एक ग्रह का नाम उनके नाम पर रखा गया था और यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय कलाकार बने थे । इंटरनेशनल एस्ट्रोनामिकल यूनियन (आईएयू) ने 'माइनर प्लेनेट' 2006 वीपी 32 (नंबर 300128) का नामकरण पंडित जसराज के नाम पर किया था जिसकी खोज 11 नवंबर 2006 को की गई थी। इस साल जनवरी में अपना 90वां जन्मदिन मनाने वाले पंडित जसराज ने नौ अप्रैल को हनुमान जयंती पर फेसबुक लाइव के जरिए वाराणसी के संकटमोचन हनुमान मंदिर के लिए दी थी। इसके अलावा उन्होंने अपनी बेटी और प्रोड्यूसर दुर्गा की संगीतमय वेब सीरिज 'उत्साह में भी भाग लिया था जो लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया पर आयोजित की जा रही है।
पंडितजी शास्त्रीय गायकी के अलावा फिल्म संगीत भी बहुत पसंद करते थेI महान फिल्मकार वी शांताराम की बेटी मधुरा उनकी पत्नी हैंl उनसे शादी का संयोग भी संगीत के जरिए ही बना। मधुरा अक्सर उनके  कार्यक्रमों में जाती थीं। कुछ साल पहले शंकर महादेवन ने एक गाना बनाया - कजरारे-कजरारे तेरे कारे-कारे नैना।  उस गाने का संगीत जसराज जी को बहुत पसंद आया। उन्होंने तुरंत संगीतकार शंकर महादेवन को फोन किया और कहा - क्या शंकर, ये कैसा म्यूजिक कर दिया? शंकर बोले- क्या हुआ बापू, कोई गड़बड़ हो गई क्या? तब जसराज जी ने हंसते हुए कहा कि कोई गड़बड़ नहीं भाई, तुमने तो कमाल का म्यूजिक दिया है।  वे सब तरह का संगीत पसंद करते थेl
उन्हें क्रिकेट में भी बहुत रुचि थी कार्यक्रमों के दौरान विदेशों रहते हुए भी वे क्रिकेट के स्कोर से अपदेट रहते थे l एक बार जब एक वनडे मैच से राहुल द्रविड़ को ‘ड्रॉप’ कर दिया गया तो जसराज जी  को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। उन्होंने कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री एस बंगारप्पा को फोन किया और कहा कि सौरव गांगुली को ‘ड्रॉप’ करते हैं, तो पूरा बंगाल साथ में खड़ा हो जाता है, आप लोग भी राहुल द्रविड़ के पीछे खड़े होइए। वह बहुत बड़े खिलाड़ी हैं। उस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडितजी, आप निश्चिंत रहिए, वह अगला मैच जरूर खेलेंगे। यह बात बाद में राहुल द्रविड़ को भी पता चल गई थी।
पंडितजी हमेशा कहते थे कि हमारे यहां एक पुरानी कहावत कही जाती थी- गुरु करे जान के, पानी पिए छान के। आप सोचकर देखिए कि पुराने जमाने के लोग कितने दूरदर्शी रहे होंगे, उन्होंने उस वक्त कहा था कि पानी पिएं छान के, आज ‘फिल्टर’ पानी ही पिया जा रहा है। परेशानी यह है कि आजकल लोग पांच साल किसी एक गुरु से सीखते हैं, फिर पांच साल किसी और से, उसके बाद किसी और से। यह भटकाव की स्थिति है। इससे जाहिर होता है कि आज के शिष्यों के पास गुरु में आस्था की कमी है।  उन्होंने बाबा श्याम मनोहर गोस्वामी महाराज के सान्निध्य में 'हवेली संगीत' पर व्यापक अनुसंधान कर कई नवीन बंदिशों की रचना भी की थी। भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनका सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान था। उनका निधन भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए अपूर्णिय क्षति हैl विनम्र श्रद्धांजलि!

- प्रभाकर पुरंदरे

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