आत्मानुशासन ही बचायेगा महामारी से

भोपाल [महामीडिया] ऐसा लगता है मानो भारत में कोरोना वायरस के कहर ने अपना पुराना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। तभी तो कई राज्यों में लॉकडाउन की स्थितियाँ बन पड़ी है ।  कोरोना संक्रमण के मामले में देश शनिवार को करीब चार महीने पुरानी स्थिति में लौट गया है, जब हर दिन 40 हजार से अधिक नए केस दर्ज किए जाते थे। लंबे अंतराल के बाद भारत में बीते चौबीस घंटे में सर्वाधिक 40,953 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इससे पहले, शुक्रवार को यह आंकड़ा 39,726 था। वहीं, पिछले साल 29 नवंबर 2020 को 41810 नए संक्रमितों की पहचान की गई थी।  स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बीते चौबीस घंटे में कोरोना वायरस के 40,953 नए केस सामने आए हैं। कोरोना वायरस से अब तक देश में 1,59,558 मौत हो चुकी है, वहीं कुल मामलों की संख्या 1,15,55,284 पहुंच गई है।
इसमें दुखद तथ्य यह है कि तब भी महाराष्ट्र सबसे आगे था और आज भी 60 प्रतिशत से ज्यादा मामले अकेले इसी राज्य से आ रहे हैं। अध्ययन करने की जरूरत है कि क्यों महाराष्ट्र में कुल संक्रमितों की संख्या देश के मुकाबले साठ फीसदी है। क्यों फिर से लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू की जरूरत पड़ने लगी है। लॉकडाउन तो तात्कालिक आपात उपाय है।  देश के लिए यह सोचने और स्थाई सुधार का समय है, ताकि पिछले साल की तरह कोरोना संक्रमण वापसी न कर सके। निस्संदेह, कोरोना संक्रमण की वापसी चौंकाने और डराने वाली है। कहीं न कहीं तंत्र के स्तर पर ढिलाई और सार्वजनिक जीवन में उपजी लापरवाही इसके मूल में है। क्रिकेट स्टेडियमों में उमड़ी भीड़, धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों में शारीरिक दूरी और मास्क के बिना लोगों की उपस्थिति पहले ही चिंता के संकेत दे रही थी। विडंबना यह भी है कि चार राज्यों व एक केंद्रशासित प्रदेश में चुनावी सभाओं और रोड शो में जिस तरह से भीड़ उमड़ रही है उसे चिंता के तौर पर देखा जाना चाहिए। विडंबना यह भी है कि कोरोना काल में मास्क लगाने, सैनिटाइजर का उपयोग और शारीरिक दूरी की जो हमने आदत डाली थी, उससे हम किनारा करने लगे थे।
यह देशवासियों की सजगता पर निर्भर करेगा कि बीते साल जैसे सख्त उपायों को दोहराने की जरूरत न पड़े। देश की अर्थव्यवस्था पहले ही संकट के दौर से उबरने की कोशिश में है। जनवरी के मध्य से चल रहे टीकाकरण अभियान के तहत अब तक तीन करोड़ से अधिक लोगों को टीके की एक या दोनों खुराक दी चुकी है ।  लेकिन यह प्रक्रिया निर्धारित लक्ष्य से कम गति से चल रही है. अगर हमें महामारी के प्रसार को नियंत्रित करना है, तो टीकाकरण में तेजी लानी होगी । पिछले एक साल में हमें कई अनुभव भी हासिल हुए हैं । उन अनुभवों से सीख लेने की जरूरत है।
 

- -प्रभाकर पुरंदरे

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