वर्षनव, हर्ष नव,जीवन उत्कर्ष नव!'

भोपाल (महामीडिया) वर्ष नव, हर्ष नव, जीवन उत्कर्ष नव।
नव उमंग, नव तरंग, जीवन का नव प्रसंग।
नवल चाह, नवल राह, जीवन का नव प्रवाह।
गीत नवल, प्रीत नवल, जीवन की रीति नवल,
जीवन की नीति नवल, जीवन की जीत नवल!
                                                           --- हरिवंशराय बच्चन  

सभी को नव वर्ष की बहुत -बहुत हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं । आज से  21वीं सदी के नए और तीसरे दशक की शुरुआत  हो रही है।  नव वर्ष का पक्ष आवश्यक रूप से विगत वर्ष का अगला चरण है। यह खट्टा, मीठा, तीखा, कई स्वादों से संपृक्त है ।  नए वर्ष व विगत वर्ष का संधि बिंदु हमें कई बार एकांत मनन की सुविधा देता है ।  नव वर्ष हमें भविष्य के दृश्य से परिचित कराने की ओर ले जाता है।  बीता वर्ष भयावह महामारी और आर्थिक उथल-पुथल से उत्पन्न दुखों एवं दुष्चिंताओं से त्रस्त व ग्रस्त रहा ।  इनके साथ विश्व के कई भागों में हिंसा, युद्ध, अशांति और अस्थिरता की समस्याएं भी रहीं।  प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के ठोस उपाय भी न हो सके।  निराशा और अवसाद के दौर से निकलकर नये वर्ष में प्रवेश करते हुए हम सभी के मन में शुभ की कामना है।  जिस तरह से बीता वर्ष अन्य बीते वर्षों की तरह नहीं था, उसी तरह यह साल भी सामान्य नव वर्ष नहीं है ।
वर्ष 2020 ने मनुष्यता के अनुभव को समृद्ध किया, जिसके आधार पर हम नये साल को सुंदर और सार्थक बना सकते हैं।  अदृश्य विषाणु के प्राणघातक संक्रमण से संघर्षरत चिकित्सकों और वैज्ञानिकों, व्यवस्था बनाये रखने में जुटे शासन-प्रशासन के कर्मियों तथा आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में लगे लोगों के साहस और उनकी लगन को हमने देखा. कई कर्मियों ने अपने कर्तव्य का निर्वाह करते हुए संक्रमित होकर जान भी दे दी।   कोई भी नया वक्त, नया साल या नया दशक एक स्वाभाविक खुशी और उम्मीद के साथ अवतरित होता है। खुशी यह होती है कि हम पुराने से नए की ओर जा रहे हैं और उम्मीद यह कि जो होगा, पहले से बेहतर होगा। यह खुशी और उम्मीद इस बार कुछ ज्यादा ही है, क्योंकि जो बीता है, वह शायद कुछ ज्यादा ही बुरा था। उस बुरे को छोड़कर हमें नए साल में आगे बढ़ना है और बहुत कुछ ऐसा अच्छा रचना है, जो हमारी उम्मीदें पूरी करके हमें खुशियों से सराबोर कर दे।
हमें अपेक्षा और आकांक्षा के साथ उत्साह के भाव से भी लबरेज होना चाहिए। महाकवी एवं लेखक हरिवंश राय बच्चन के शब्द हैं -- 'वर्ष नव, हर्ष नव, जीवन उत्कर्ष नव ।' इस क्रम में हमें समस्याओं और चुनौतियों का ध्यान सदैव रहना चाहिए। यह ध्यान भी रहे कि सामूहिकता और सामाजिकता से ही समाधान संभव है. भेदभाव, घृणा, हिंसा, अपराध जैसे आचरण इस संभावना की राह की बाधाएं हैं. प्रकृति को नष्ट करना अपने अस्तित्व को ही खतरे में डालना है।
केवल कैलेंडर की तारीख बदलना नव वर्ष नहीं। केवल बारह महीने बीत जाना वर्ष की विदाई नहीं। इसके लिए अंतर्दृष्टि और कालपथ पर पदचाप दर्ज करना आवश्यक है। नयी संभावना, नयी दृष्टि, संघर्ष और लालित्य का प्रवेश ही नव वर्ष है। विषाणु का उपचार तो पा लिया गया है और आगे भी ऐसे आकस्मिक समस्याओं से निपटने की क्षमता हममें है, किंतु समाज में विभेद, राष्ट्रों के वैमनस्य और आगे निकलने की नकारात्मक होड़ जैसी बीमारियों को दूर करना भी हमारी प्राथमिकताओं में होना चाहिए। कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन से फैले कहर के बीच दो जनवरी को होने वाले देश के सभी राज्यों में ड्राई रन से पहले वैक्सीन की आपात इस्तेमाल को लेकर आज एक अहम बैठक है। भारत सरकार की केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के विशेषज्ञों की समिति फाइजर और ऑक्सफोर्ट समेत कई टीकों के आपात इस्तेमाल की मंजूरी को लेकर अहम बैठक के बाद इस पर फैसला लेगी। यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फाइजर की वैक्सीन को इमरजेंसी यूज के लिए मंजूरी दे दी है और भारत सरकार की समिति के मंथन की लिस्ट में यह भी शामिल है।
नए साल की पहली सुबह उगने वाले सूरज की ऊष्मा भरी किरणें सभी पर समान रूप से पड़ें। यह सूर्योदय सबको निरोगी बनाए, सबकी सेहत सुधारे और सबको अपनी ताकत से बीमारियों से लड़ने की क्षमता दें।
 

- -प्रभाकर पुरंदरे

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