पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी की नाराजगी

भोपाल (महामीडिया) सत्तर के दशक के जाने-माने लेग-स्पिनर और भारत के पूर्व क्रिकेटर बिशनसिंह बेदी ने दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में अरुण जेटली की प्रतिमा लगाए जाने के फैसले से नाराज होकर दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन  यानी  डीडीसीए  की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बेदी का कहना है कि जेटली चापलूसों से घिरे रहते थे। वे काबिल नेता जरूर थे, लेकिन एक गूगल सर्च से पता चल जाएगा कि जेटली के वक्त डीडीसीए में कितना भ्रष्टाचार हुआ। बेदी का मानना है की नाकामियों को भुलाया जाता है, इस तरह प्रतिमा लगाकर नाकामियों का जश्न नहीं मनाया जाता।
भारत के लिए 67 टेस्ट में 266 विकेट ले चुके पूर्व क्रिकेटर बेदी ने जेटली के बेटे और मौजूदा डीडीसीए अध्यक्ष रोहन जेटली को चिट्‌ठी लिखकर ये बातें कही हैं। उन्होंने कोटला स्टेडियम में अपने नाम का स्टैंड हटाने की भी मांग की है। बेदी ने यह खत तब लिखा है, जब 28 दिसंबर को अरुण जेटली के जन्मदिन के मौके पर 6 फीट ऊंची प्रतिमा कोटला स्टेडियम में लगाई जानी है। 700 किलोग्राम वजनी इस प्रतिमा को अहमदाबाद में बनाया गया है और इसे एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री रहे स्व अरुण  जेटली 1999 से 2013 तक यानि  14 साल तक डीडीसीए के अध्यक्ष रहे। उनके बाद 19 18  में  रजत शर्मा पूर्व क्रिकेटर मदनलाल को हराकर डीडीसीए  प्रेसिडेंट बने थे । उनके इस्तीफे  के बाद जेटली के बेटे रोहन को बिना विरोध अध्यक्ष चुना गया था। जेटली का पिछले साल 24 अगस्त को निधन हो गया था। इसके बाद 12 सितंबर 2019 को फिरोज शाह कोटला स्टेडियम का नाम बदलकर अरुण जेटली स्टेडियम कर दिया गया था।
डीडीसीए की स्थापना १८८३ में हुई थीी यह दिल्ली में क्रिकेट की गवर्निंग बॉडी हैी बीसीसीआई ने 1928 में इसे  मान्यता दीI डीडीसीए का हेडक्वार्टर फिरोज शाह कोटला स्टेडियम में है I  यह कोलकाता के ईडन गार्डन के बाद देश का सबसे बड़ा स्टेडियम है I  यहाँ चार स्टैंड हैं जो पूर्व क्रिकेटर स्व लाला अमरनाथ, बिशनसिंह बेदी, गौतम गंभीर और विराट कोहली के नाम पर हैंI 
कहते है खेलों को सदा राजनीती से दूर रखना चाहिए, लेकिन राजनीतिज्ञों का सदा ही खेलों में दखल रहा है I  यूँ कहे खेल और  राजनीती का सदा ही वास्ता रहा हैI देश के कई खेल संगठनों पर राजनीतिज्ञों का ही वर्चस्व है I यह  बेहद दुखद है  की  बिशनसिंह बेदी जैसे वरिष्ठ खिलाडी को डीडीसीए की भीतरी राजनीती की वजह से इस्तीफा देना पड़ाI राजनीती में भले ही बहुत खेल हो, परन्तु खेलों में कतई राजनीती नहीं होनी चाहिएI 
 

- -प्रभाकर पुरंदरे

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