बढ़ती महंगाई और आमजन का संघर्ष

भोपाल (महामीडिया) रसोई गैस की कीमत एक बार फिर बढ़ गई है। सरकारी तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को कीमतों की समीक्षा करती हैं। 1 मार्च को हुई समीक्षा के बाद घरेलू रसोई गैस सिलेंडर यानी 14.2 kg वाले सिलेंडर की कीमत में 25 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही राजधानी दिल्ली में बिना सबसिडी वाले सिलेंडर की कीमत 819 रुपए पहुंच गई है। चार दिन में यह दूसरा मौका है जब रसोई गैस महंगी हुई है। वहीं एक महीने की बात करें तो दाम चौथी बार बढ़े हैं। फरवरी में रसोई गैस 100 रुपए प्रति सिलेंडर महंगी हुई थी। आज की बढ़ोतरी के बाद यह आंकड़ा 125 रुपए प्रति सिलेंडर पहुंच गया है।
महामारी के बाद आर्थिक गतिविधियों में सुधार के संकेत स्पष्ट दिखने लगे हैं। लेकिन, आमदनी और बचत के लिए आमजन का संघर्ष अभी भी जारी है। देश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई को पार कर शतक के करीब पहुंच रही है। पिछले एक वर्ष में पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर लगभग 18 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।  गैस की कीमतों में बढ़ोत्तरी ने और मुश्किलें बढ़ा दी है।  ईंधन की ऊंची कीमतों का असर महंगाई पर पड़ेगा, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होगा।
मोदी सरकार के लिए यह संतोषजनक है कि महंगाई अभी भी निर्धारित लक्ष्य सीमा के अंदर ही है। हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी या कमी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और डॉलर एक्सचेंज के रेट पर भी निर्भर करती है। महामारी के बाद से उपभोक्ता मांग पूरी तरह से पटरी पर नहीं लौटी है। फिर भी कोर इन्फ्लेशन (इसमें खाद्य और ईंधन शामिल नहीं) बढ़ रही है। हालांकि, पिछले महीने के आंकड़ों के मुताबिक हेडलाइन इन्फ्लेशन में गिरावट की प्रवृत्ति जारी रही। गैर-खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव आगे की चुनौतियों को और बड़ा कर सकता है। कीमतों में बढ़त, महामारी की वजह से कारोबार पर पड़े दुष्प्रभाव को मामूली तौर पर कमतर कर सकती है।  वस्तुओं की तरह सेवाओं की लागत को आयात जैसे विकल्पों के माध्यम से कम नहीं किया जा सकता है।
सैद्धांतिक तौर पर मांग में कमी का असर कीमतों में गिरावट के तौर पर दिखता है, लेकिन बाजार की आंतरिक जटिलताओं के कारण यह पूरी तरह से सच नहीं होता। इसी वजह से बड़े और छोटे उद्यमों के बीच अंतर स्पष्ट होता है। कीमतों को नियंत्रित करने की ताकत की वजह से कोर इन्फ्लेशन बढ़ जाता है। आपूर्ति बाधित होने से कीमतों को बढ़ाने का मौका मिल जाता है।महामारी की वजह से आपूर्ति बाधित हुई, जिसका सबसे अधिक नुकसान छोटे उद्यमों को हुआ। छोटे और मझोले कारोबारों के दोबारा पटरी पर लौटने पर ही आपूर्ति के इस मसले का समाधान हो सकता है।
 

- -प्रभाकर पुरंदरे

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