"आत्मनिर्भर" भारत का संकल्प!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार शाम राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में देश को "आत्मनिर्भर" बनाने का संकल्प लेने की घोषणा की। कोरोना महामारी के चलते पिछले पचास दिनों में प्रधानमंत्रीजी का राष्ट्र के नाम यह पांचवां संबोधन था। जैसी कि उम्मीद थी, प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ रुपए के विशाल आर्थिक पैकेज की घोषणा की। यह देश की जीडीपी का 10 प्रतिशत है और दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा पैकेज है। यह पैकेज मजदूरों, माध्यम वर्ग, एमएमएमई और उद्योग जगत के लिए होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जल्द ही इसके विस्तार की घोषणा करेंगी। एमएसएमई के लिए विशेष पैकेज आपेक्षित था, क्योंकि इससे करीब ग्यारह करोड़ लोगों का रोजगार जुड़ा है।

प्रधानमंत्री ने इस पैकेज में लैंड, लेबर, लिक्विडिटी और लॉ  पर बल दिया।

कोरोना संकट काल में लोकल उत्पादकों और लोकल मार्केट ने बहुत अहम भूमिक्स अदा की। दरअसल, लोकल ने ही हमारी मांग पूरी की। इसीलिए प्रधानमंत्री ने लोकल उत्पाद और लोकल मार्केट की वकालत की और 'लोकल के लिए वोकल" होने की देशवासियों से गुजारिश की।

प्रधानमंत्री ने इकॉनमी, इंफ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम, डेमोग्राफी और डिमांड को आत्मनिर्भरता की इमारत का स्तंभ बताया।

एक बात तो स्पष्ट है जब तक कोरोना महामारी का कोई वैक्सीन ईजाद नहीं हो जाता तब हमें इसी के साथ  "सतर्क जीवन शैली" अपनाते हुए जीना पड़ेगा। एक वायरस ने पूरी दुनिया को तहस-नहस कर दिया है। दुनिया भर में इस महामारी से 42 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और पौने लाख लोगों कीजाने जा चुकी हैं।

यह विडंबना ही है कि प्रधानमंत्री ने 24 मार्च को जब पहली बार देशवासियों को संबोधित कर प्रथम लॉक डाउन की घोषणा की थी तब भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या महज 500 के आस-पास थी। लेकिन आज जब लॉकडाऊन का तीसरा चरण ख़त्म होने जा रहा है तब कोरोना संक्रमितों की संख्या 75 हजार क़े पार हो चुकी है।

इस लॉकडाउन के दौरान केंद्र और राज्य सरकारों ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने-अपने स्तर पर इस महामारी पर नियंत्रण करने का भरपूर प्रयास किया और योजनाओं और रणनीतियों पर मंथन किया।

लॉकडाउन के प्रथम चरण के दौरान हमारे पास बहुत ही सीमित मात्रा में एन-95 मास्क, पीपीई किट्स उपलब्ध थे। लेकिन आज हम हर रोज दो लाख से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मानक स्तर के मास्क और पीपीई किट्स का निर्माण कर रहे हैं।

कहते हैं न जहाँ चाह, वहाँ राह। महामारी की इस आपदा ने हमें न केवल आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित किया, बल्कि हमें अवसरों को भी पहचाने का मौका दिया।

- प्रभाकर पुरंदरे

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