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रामकथा में श्रृद्धालुओं को मिल रही है सीख

admin | पोस्ट किया गया 200 दिन पूर्व
03/04/2017


भोपाल । चैत्र नवरात्र के अवसर पर महर्षि संस्थान में चल रहे श्री सहस्त्र चण्डी महायज्ञ में आज चौथे दिन देवी मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना की गई तो वहीं प्रसिद्ध रामकथा वाचक पण्डित शास्त्री जी ने रामकथा का सार बताते हुए उपस्थित श्रृद्धालुओं को जीवन में कुछ सीखने के सूत्र भी दिए । पं. शास्त्री जी ने विष मोहनी प्रसंग के माध्यम से समझाया कि किसी से कभी कुछ मांगना नही चाहिए । साथ ही नारद मुनी का उदाहरण बातते हुए कहा कि एक बार मोहमाया के चक्कर में नारद जी ने अपने रूप को सुंदर बनाने की मांग की थी, भगवान ने उन्हें वानर रूप प्रदान कर दिया । पं. शास्त्री जी ने कहा-मांगने से आदमी छोटा होता है, भगवान ने भी राजा बली से कुछ मांगा था उन्हें भी छोटा होना पड़ा । दुनिया से मांगोगे तो वे दिखा के देंगे, लेकिन भगवान से बिन मांगे ही सबकुछ मिल जाता है । जीवन में जब भी उथल-पुथल हो भगवान शिव की शरण में चले जाना चाहिए । भगवान शिव बड़े ही भोले हैं, शिव की आराधना से कईयों का उद्धार हो चुका है । साथ ही कथा के दौरान "देना है तो दीजिए जन्म-जन्म का साथ........." गीत पर श्रृद्धालुगण झूम उठे । भोजपुर मार्ग स्थित महर्षि उत्सव प्रागंण में आज पूजन हवन और रामकथा में सैकड़ों की संख्या में श्रृद्धालुओं ने शामिल होकर पुण्य लाभ लिया ।
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