आज बेटी दिवस : भारतीय सेना की 5 बहादुर महिला अफसर

आज बेटी दिवस : भारतीय सेना की 5 बहादुर महिला अफसर

नई दिल्ली (महामीडिया) आज ‘बेटी दिवस’ है। हर साल सितंबर महीने के चौथे रविवार को बेटी दिवस मनाया जाता है। डॉटर्स डे बेटियों के लिए खास है। इस दिन बेटियों की सफलता पर बात होनी ही चाहिए। पूरी दुनिया में कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां महिलाएं ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। आज बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। आज भारतीय सेना की पांच ऐसी, बहादुर महिला अफसर के बारे में बताएंगे, जो इस साल काफी चर्चा में रहीं।
शिवांगी सिंह: शिवांगी सिंह उत्तर प्रदेश के वाराणसी की रहने वाली हैं। शिवांगी सिंह राफेल उड़ाने वाली पहली महिला पायलट बनने जा रहीं हैं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह 'कन्वर्जन ट्रेनिंग' पूरा करते ही वायुसेना के अंबाला बेस पर 17 'गॉल्डन एरोज' स्क्वैड्रन में शिवांगी सिंह औपचारिक एंट्री लेंगी।
सब लेफ्टिनेंट रीति सिंह: भारतीय नौसेना ने इसी साल के सितंबर में पहली बार हेलिकॉप्‍टर स्‍ट्रीम में दो महिलाओं को 'ऑब्‍जर्वर्स' (एयरबोर्न टैक्‍टीशियंस) के रूप में चुना है। सब लेफ्टिनेंट रीति सिंह का इसमें नाम शामिल है। रीति सिंह भारत की उन पहली महिला एयरबोर्न टेक्‍टीशियंस होंगी, जो जंगी जहाजों के डेक से काम करेंगी। 'ऑब्जर्वर' के रूप में स्नातक होने पर "विंग्स" से सम्मानित किया गया है।
सब लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्‍यागी: सब लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्‍यागी भी रीति सिंह के साथ महिला एयरबोर्न टेक्‍टीशियंस बनी हैं, जो जंगी जहाजों के डेक को संभालेंगी। इससे पहले नेवी में अब तक महिला अफसरों को फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट तक सीमित रखा गया था। 
गुंजन सक्सेना: गुंजन सक्सेना भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट रह चुकी हैं। 44 वर्षीय गुंजन अब रियाटर हो चुकी हैं। गुंजना सक्सेना को कारगिल गर्ल के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि गुंजन पहली महिला पायलट थीं, जिन्होंने कारगिल के दौरान फाइटर प्‍लेन उड़ाया था। गुंजन को शौर्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
मिताली मधुमिता: मिताली मधुमिता को साल 2011 में सेना के पदक से सम्मानित किया गया था। मिताली मधुमिता सेना का पदक पाने वाली देश की पहली महिला अधिकारी बनीं थी। वर्ष 2010 में जब काबुल स्‍थ‍ित भारतीय दूतावास पर हमला हुआ था तो मिताली वहां पहुंचने वाली पहली अफसर थीं। उस समय उनके पास वहां कोई खास हथियार नहीं थे। इसके बावजूद भी मिताली ने वहां डटकर मोर्चा संभाला और पूरे ऑपरेशन को लीड किया।
 

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