गंगा हमारी आस्था और वैभव का प्रतीक-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 

गंगा हमारी आस्था और वैभव का प्रतीक-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 

नईदिल्ली [ महामीडिया] प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वाकांक्षी परियोजना नमामि गंगे के तहत उत्तराखंड में बने आठ सीवर ट्रीटमेंट प्लांट  का वर्चुअल लोकार्पण किया। इस दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देव की धरा को नमन किया है। उन्होंने कहा कि गंगा हमारी आस्था और वैभव का प्रतीक है। गंगा की अविरलता जरूरी है। गंगा की सफाई में कई अभियान चले। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चारधाम की पवित्रता को अपने समेटे देवभूमि उत्तराखंड को मेरा आदरपूर्वक नमन। आज मोक्षदायनी गंगा को निर्मल करने वाले छह बड़े प्रोजेक्ट का लोकापर्ण किया गया है। हर घर तक शुद्ध जल पहुंचाने का बहुत बड़ा अभियान है। पानी की एक एक बूंद को बचाना आवश्यक है। यह मिशन गांव के लोगों और ग्राम पंचायत के लोगों के लिए भी उतना ही ज़रूरी है, जितना की अधिकारियों के लिए। उत्तराखंड में उद्गम से लेकर पश्चिम बंगाल में गंगा सागर तक गंगा देश की आधी आबादी का पालन करती है, इसलिए गंगा की स्वच्छता निर्मलता आवश्यक है। पूर्व में कई बड़े बड़े अभियान चलाए, मगर गंगा का जल न स्वच्छ हो पाया और न निर्मल।
अगर पुराने तौर-तरीके अपनाए जाते, तो आज भी हालत उतनी ही बुरी रहती। लेकिन हम नई सोच, नई अप्रोच के साथ आगे बढ़े। हमने नमामि गंगे मिशन को सिर्फ गंगा जी की साफ-सफाई तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे देश का सबसे बड़ा और विस्तृत नदी संरक्षण कार्यक्रम बनाया। सरकार ने चारों दिशाओं में एक साथ काम आगे बढ़ाया। पहला- गंगा जल में गंदा पानी गिरने से रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का जाल बिछाना शुरू किया। दूसरा- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ऐसे बनाए, जो अगले 10-15 साल की भी जरूरतें पूरी कर सकें। तीसरा- गंगा नदी के किनारे बसे सौ बड़े शहरों और पांच हजार गांवों को खुले में शौच से मुक्त करना और चौथा- जो गंगा जी की सहायक नदियां हैं, उनमें भी प्रदूषण रोकने के लिए पूरी ताकत लगाना।
पीएम ने कहा कि प्रयागराज कुंभ में गंगा जी की निर्मलता को दुनियाभर के श्रद्धालुओं ने अनुभव किया था। अब हरिद्वार कुंभ के दौरान भी पूरी दुनिया को निर्मल गंगा स्नान का अनुभव होने वाला है। अब गंगा म्यूजियम के बनने से यहां का आकर्षण और अधिक बढ़ जाएगा। ये म्यूजियम हरिद्वार आने वाले पर्यटकों के लिए, गंगा से जुड़ी विरासत को समझने का एक माध्यम बनने वाला है। आज पैसा पानी में नहीं बहता, पानी पर लगाया जाता है। हमारे यहां तो हालत ये थी कि पानी जैसा महत्वपूर्ण विषय, अनेकों मंत्रालयों और विभागों में बंटा हुआ था। इन मंत्रालयों में, विभागों में न कोई तालमेल था और न ही समान लक्ष्य के लिए काम करने का कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश। 
 

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