भारत ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति से चीनी भाषा हटाई 

भारत ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति से चीनी भाषा हटाई 

नई दिल्ली (महामीडिया) दो दिन पहले केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विदेशी भाषाओं के बीच चीनी भाषा का उल्लेख नहीं किया है. ये वो फॉरेन लैंग्वेज की लिस्ट है जिसे सेकेंड्री लेवल पर स्टूडेंट्स सीख सकते हैं. 2019 में जारी मसौदे में ‘चीनी’ भाषा का उल्लेख किया गया था. इसमें फ्रेंच जर्मन, स्पेनिश, चीनी और जापानी को विदेशी भाषाओं के रूप में उल्लेखित किया था, इन्हें एच्छिक भाषा के रूप में पेश किया गया था, न कि थ्री लैग्वेज फॉर्मूला की जगह.
बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा जारी की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में चीनी भाषा शामिल नहीं है. इनमें कोरियन, जापानी, थाई, फ्रेंच, जर्मन, स्पैनिश, पुर्तुगीज़ और रशियन को शामिल किया गया है. जो स्टूडेंट्स विश्व संस्कृति और दुनिया के बारे में जानकारी इकट्ठा करना चाहते हैं वो अपनी इच्छा के मुताबिक इन भाषाओं को सीख सकते हैं.
लैंग्वेज हटाने के पीछे वज़ह साफ
NEP से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक वो इस बदलाव के बारे में नहीं जानते हैं, लेकिन अगर इसमें चीनी भाषा नहीं है तो उसके पीछे का कारण साफ है. भारत ने लद्दाख फेसऑफ के बाद अब तक करीब 100 चीनी एप्स को बैन किया है.
फॉरेन लैंग्वेज टीचर्स के मुताबिक 2017 के बाद से बैंगलौर में चीनी भाषा पापुलर हो रही थी, जिसने एशियन लैंग्वेज के मामले में जैपनीज़ को पीछे छोड़ दिया था. हालांकि मार्च 2020 में किसी ने चीनी लैंग्वेज के प्रोग्राम के लिए आवेदन नहीं किया.
 

सम्बंधित ख़बरें