कुल्लू दशहरा महोत्सव शुरू

कुल्लू दशहरा महोत्सव शुरू

कुल्लू (महामीडिया) लोकनृत्य उत्सव कुल्लू दशहरा भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ शुरू हो गया है। दशहरा उत्सव में शामिल होने कुल्लू पहुंचे आठ देवी देवताओं ने रघुनाथ के दरबार में हाजिरी भरी है। सुबह से रघुनाथ की नगरी रघुनाथपुर में देवी देवताओं के आने का सिलसिला जारी है। ढोल नगाड़ों व नरसिंगों की स्वरलहरियों से पूरी घाटी गूंज उठी है।
लोगों ने जगह-जगह देवी-देवताओं का स्वागत कर आशीर्वाद लिया। माता हिडिंबा, देवता जमलू और लक्ष्मी नारायण ने कहा कि किसी प्रकार से डरने की बात नहीं, दशहरा में कोई अनहोनी नहीं होने देंगे। दशहरा में बिन बुलाए जिला कुल्लू के मेहा के नारायण और डमचीन के देवता गोहरी भी ढालपुर के लिए रवाना हुए हैं।
कुल्लू दशहरे में प्रतिदिन शाम को राजा की शोभायात्रा निकलती है। इसे जलेब कहते हैं। यह राजा के अस्थाई शिविर से निकलती है और मैदान का चक्कर लगाकर वापिस शिविर में लौटती है। जलेब में राजा को पालकी में बिठाया जाता है जिसे सुखपाल कहते हैं। इस जलेब में आगे नारसिंह की घोड़ी चलाई जाती है। अलग-अलग दिन अलग-अलग घाटियों के देवी देवता अपने वाद्य यंत्रों सहित इस जलेब में भाग लेते हैं । दशहरे के छठे दिन को मुहल्ला कहते हैं। इस दिन सभी देवताओं का महामिलन होता है। सभी देवी देवता रघुनाथ जी के शिविर में पहुंचते हैं और आपस में बड़े हर्षोउल्लास से मिलते हैं। 

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