साहित्य : लघु  कथाएं सरल और सहज होनी चाहिए 

साहित्य : लघु  कथाएं सरल और सहज होनी चाहिए 

भोपाल [ महामीडिया]  लघुकथा यदि अपने इर्द-गिर्द की घटनाओं और विषयों को लेकर लिखी जाएं तो वह पाठक को और भी ज्यादा बेहतर ढंग से खुद से जोड़ पाती है। इस पर यदि लघुकथा सरल, सहज और सटिकता से रची गई हो तो वह और भी पठनीय हो जाती है। इस लघुकथा संग्रह में शामिल यह रचनाएं ऐसी ही हैं। यह बात वरिष्ठ साहित्यकार सूर्यकांत नागर ने लघुकथा संग्रह कोरोना कौमुदी के विमोचन अवसर पर व्यक्त किए। श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति के  इंदौर सभागृह में यह पुस्तक विमोचन कार्यक्रम संपन्न हुआइस कार्यक्रम में विशेष अतिथि सूर्यकांत नागर ने रचनाकार सुजाता देशपांडे के इस लघुकथा संग्रह के बारे में कहा कि ये रचनाएं समकालीन यथार्थ के प्रति सजग हैं वे सामाजिक सरोकार रखती हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डा. विकास दवे थे। डा. दवे ने कहा कि लेखिका ने रचनाओं में जो संदेश दिए हैं उनका और उत्साह की भावनाओं का अनुसरण किया जाना चाहिए। गैर हिंदी भाषी प्रांत की होने के बावजूद लेखिका का हिंदी के प्रति समर्पण तारीफ के काबिल है।
 

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