चीन के कर्जजाल में फँसा मॉलदीव

चीन के कर्जजाल में फँसा मॉलदीव

नईदिल्ली [महामीडिया] भारत का पड़ोसी देश मालद्वीप चीन के कर्ज में फस गया है। कर्जजाल में फंसाकर मनचाहा हड़पने की चीनी नीति इस देश में सफल होती दिख रही है। भारत के पड़ोसी देश मालदीव के सिर पर ड्रैगन ने इतना कर्ज का बोझ लाद दिया है कि अब उसे श्रीलंका की तरह बहुत कुछ खोने का डर सताने लगा है। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था वाला देश किस तरह चीनी कर्ज में डूबा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मालदीव को 3.1 अरब डॉलर चीनी लोन चुकाना है, जबकि उसकी कुल अर्थव्यवस्था 4.9 अरब डॉलर की है। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और अब संसद के स्पीकर नाशीद के मुताबिक, देश पर चीन का 3.1 अरब डॉलर का कर्ज था। यह कर्ज सरकार, सरकारी कंपनियों के अलावा निजी कंपनियों को भी दिया गया, जिसकी गारंटी मालदीव सरकार ने ली थी। नाशीद अब चिंता जाहिर करते हैं कि उनका देश कर्ज जाल में फंस चुका है। उनका कहना है कि जो भी प्रोजेक्ट इन पैसों से शुरू किए गए वे इस लायक नहीं हैं कि कर्ज चुकाने लायक रेवेन्यू जेनरेट कर सकें। उनका तो यह भी कहना है कि कागज पर यह कर्ज असल में प्राप्त हुई राशि से अधिक है । मालदीव पर चीन का कुल कर्ज 3.1 अरब डॉलर है यानी करीब 2282 करोड़ रुपए है, जबकि भारत के पड़ोसी और पर्यटन पर टिके छोटे से देश की आबादी 5 लाख 16 हजार है। यानी मालदीव के हर व्यक्ति के सिर पर 4.42 लाख रुपए का कर्ज है
 

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