चैत्र नवरात्र में ब्रह्मयोग में नाव पर आएंगी मां

चैत्र नवरात्र में ब्रह्मयोग में नाव पर आएंगी मां

भोपाल [ महामीडिया ] शक्ति की उपासना के पर्व चैत्र नवरात्र की शुरुआत 25 मार्च से होगी। इस वर्ष मां के आगमन का वाहन 'नाव' होगी। इसका प्रभाव शुभ माना गया है। घटस्थापना के अवसर पर ब्रह्मयोग रहेगा। दिवसपर्यंत रेवती नक्षत्र रहेगा। भक्त माता शक्ति की उपासना में जुटेंगे। 24 मार्च मंगलवार के दिन दोपहर 2:58 से एकम तिथि लगेगी जो दूसरे दिन अर्थात 25 मार्च को दोपहर 5:26 बजे तक रहेगी। घट स्थापना व कलश स्थापना के लिए ब्रह्ममुहूर्त को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस पूरे दिन रेवती नक्षत्र रहेगा व दोपहर 03.36 बजे तक ब्रह्म योग रहेगा। अत: 25 मार्च को चैत्र नवरात्र में घट स्थापना एवं कलश स्थापना करना मंगलकारी होगा। हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2077 'प्रमादी' की शुरुआत भी होगी।वार के अनुसार तय होता है माता का वाहन : ज्योतिर्विदों के अनुसार सप्ताह के दिन के हिसाब से माता के वाहन का चयन किया जाता है। नवरात्र का पहला दिन यदि रविवार या सोमवार हो तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। यदि शनिवार और मंगलवार से नवरात्र की शुरुआत हो तो माता घोड़े, गुरुवार और शुक्रवार का दिन होने पर माता की सवारी पालकी पर मानी जाती है। अगर नवरात्र बुधवार से शुरू हो तो मां दुर्गा नाव में सवार होकर आती हैं।महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने आश्रम से जुड़े भक्तों से अपील की है कि वे चैत्र नवरात्र में अपने घरों में ही रहकर दुर्गा सप्तशती, ललिता सहस्र नामावली, रामचरित मानस आदि का जाप एवं पारायण सबके आरोग्य की कामना के साथ करें। मंदिर के पट केवल जगदंबा की नित्य सेवा, पूजा और आरती के लिए ही खुलेंगे। केंद्र सरकार द्वारा जारी एडवायजरी को देखते हुए देश के अनेक तीर्थस्थलों, ज्योतिर्लिंगों एवं प्रमुख मंदिरों पर धार्मिक गतिविधियां स्थगित की गई हैं। विद्याधाम परिवार ने भी आपात बैठक में निर्णय लिया है कि चैत्र नवरात्र में भी मंदिर में कोई सामूहिक अनुष्ठान नहीं होगा। मंदिर की गोशाला में प्रवेश केवल सुबह 7 से 9 एवं शाम 4 से 7 बजे तक ही संभव होगा।
 

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