विज्ञानं : आखिर क्या है  "कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी" 

विज्ञानं : आखिर क्या है  "कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी" 

नईदिल्ली [ महामीडिया] दुनिया के सबसे अमीर शख्स ऐलन मस्क नई-नई टेक्नोलॉजी पर दांव लगाने के लिए जाने-जाते हैं। ऐसी ही एक टेक्नोलॉजी है "कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी". यह टेक्नोलॉजी बिल्कुल नई है। इस पर ऐलन मस्क ने करीब 720 करोड़ रुपये खर्च करने का ऐलान किया है। जैसा की नाम से जाहिर होता है कि इस टेक्नोलॉजी में कार्बन उत्सर्जन को वातारण में फैलने से पहले रोका जाता है, जिससे ग्लोबल हीटिंग की समस्या को कम किया जा सके। कार्बन कैप्चर टेकनोलॉजी में बड़ी फैक्ट्रियों और पावर प्लांट की चिमनियों से कार्बन डाइ आक्साइज को निकलने से रोका जाता है। मतलब इन्हें कैप्चर करके दूसरी जगह स्टोर किया जाता है, जिससे यह वातारण को नुकसान न पहुंचा सके। इसके लिए फैक्ट्री की चिमनी पर सालवेंट फिल्टर लगाया जाता है। इसके बाद इसे स्टोर करके गहराई में इजेक्ट कर दिया जाता है, जहां से जीवाश्म गैस आती है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल प्लास्टिक बनाने, ग्रीन हाउस पौधों को उगाने और कार्बोनेट फिजी पेय बनाने में किया जा सकता है। बता दें कि पिछले साल कार्बन उत्सर्जन में तेजी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 


 

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