काशी के पांच घाटों से शुरू हुआ देव दीपावली का उत्सव

काशी के पांच घाटों से शुरू हुआ देव दीपावली का उत्सव

नईदिल्ली  [ महामीडिया] काशी की उत्तर वाहिनी गंगा के तट पर देव दीपावली के दिन पूरा देवलोक उतर आता है। देव दीपावली का विहंगम व मनोरम दृश्य आंखों में उतारने के लिए हर मन आतुर रहता है। साढ़े तीन दशक पहले पंचगंगा सहित पांच घाटों से शुरू हुई देव दीपावली अगले एक दशक में सात समंदर पार कर महापर्व बन गई। इस बार तो देव दीपावली के इतिहास में पहली बार कोई प्रधानमंत्री भागीदारी कर रहा है। इससे भारत ही नहीं पूरे विश्व की निगाहें काशी की देव दीपावली पर टिकी हुई हैं। ऐसे में लोग सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर देव दीपावली की भव्यता का इतिहास भी खोज रहे हैं। काशी में पंचगंगा घाट से देव दीपावली की शुरूआत हुई थी। इससे पहले क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से केवल दीपोत्सव होता था। वर्ष 1985 में मंगला गौरी मंदिर के महंत नारायण गुरु ने देव दीपावली को वृहद् और विहंगम रूप देने का प्रयास किया। उन्होंने देखा कि गंगा घाट बाढ़ के बाद भी काफी गंदे रहते हैं। कोई साफ सफाई नहीं होती। पर्यटकों को भी इससे असुविधा होती है। ऐसे में उन्हें विचार आया कि घाटों पर दीया जलाया जाए तो साफ सफाई भी हो जाएगी। उन्होंने पंचगंगाघाट के साथ पांच अन्य घाटों पर दीया जलाने की शुरुआत कराई।

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