कोरोना से बचाव के लिये क्या करें और क्या न करें!

कोरोना से बचाव के लिये क्या करें और क्या न करें!

भोपाल [महामीडिया] 
प्रिय मित्रों, 
आपको स्मरण कराना है कि अब तक सम्पूर्ण विश्व में कोरोना, कोविड-19 से 12,33,02,242 (बारह करोड़ तैंतीस लाख दो हजार दौ सौ बयालीस) व्यक्ति संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 27,27,837 (सत्ताइस लाख, सत्ताइस हजार) से अधिक व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है। भारतवर्ष में अब तक 1,17,00,000 (एक करोड़ सत्रह लाख) व्यक्ति संक्रमित हो चुके हैं जिसमें से 1,60,000 (एक लाख साठ हजार) असमय मृत्यु को प्राप्त हुए हैं। आज प्रातः की सूचना के अनुसार कोरोना की नई लहर में आज 53,000 से भी अधिक भारतीय नागरिक प्रभावित हुये हैं। कोरोना के नये-नये रूप भी सामने आ रहे हैं।
मास्क पहनना, दिनभर साबुन से हाथ धोना, सेनेटाइजर से हाथों को स्वच्छ रखना, केवल अतिआवश्यक कार्य से ही बाहर निकलना, भीड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना, घर में आने वाले सामान को अच्छे से धोकर या सेनेटाइज करके ही उपयोग में लाना, आदि उपाय अब हम सबको याद हो गये हैं किन्तु लापरवाही न करने वाली बात शायद हम अभी भी पूरी तरह समझ नहीं पाये हैं। सड़कों और बाजारों में भारी भीड़, समाचार चैनल्स पर दिनभर लापरवाही की तस्वीरें यह सिद्ध कर देती हैं कि हम स्वयं ही अपनी सुरक्षा के प्रति सजग नहीं हैं। प्रान्तीय सरकारें और राष्ट्रीय सरकार क्या करें, कहां तक हमें वही पाठ नित्य पढ़ायें। अब तो एक वर्ष हो गये। और कितना समय चाहिये? और कितना पाठ पढ़ाया जाये? कितनी बार नाइट कर्फ्यू और टोटल लॉकडाउन लगाया जाये? कितनी बार जुर्माने किये जायें? कितनी बार आयुष काढ़े की रेसिपी बताई जाये? हमें यह समझना होगा कि हमारा अपना और हमारे आसपास सभी का जीवन अत्यन्त मूल्यवान है। मानव जीवन यूँही व्यर्थ कर देने के लिये नहीं है, जिसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष अर्थात् जीवन का अन्तिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करने का लक्ष्य है। यदि हम अपना जीवन असमय ही गंवा देंगे तो मोक्ष के अन्तिम लक्ष्य तक पहुंच ही नहीं पायेंगे। आइये हम जीवन मूल्यों को और जीवन के मूल्य को समझें।
समस्त भौतिक उपायों के साथ-साथ हमें कुछ मानसिक उपाय भी करने होंगे। नित्य योगासन, व्यायाम, प्राणायाम और स्वच्छता के मापदण्डों का पालन करने के साथ-साथ मानसिक शाँति के लिये परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी द्वारा प्रणीत भावातीत ध्यान का नित्य प्रातः सन्ध्या 15-20 मिनिट अभ्यास भी करना चाहिये। भावातीत ध्यान का अभ्यास सम्पूर्ण विश्व में सभी धर्मों, वर्गों के व्यक्तियों द्वारा किया जाता है।
700 से अधिक वैज्ञानिक शोधों का प्रकाशन 5000 से अधिक पृष्ठों में 7 वालयूम्स में अबतक हो चुका है। भावातीत ध्यान का नियमित अभ्यासकर्ता को मानसिक शाँति, नवीन ऊर्जा, अपरिमित शक्ति, उत्साह व आनन्द प्रदान करता है। अतः आप सभी से अनुरोध है कि महर्षि जी का भावातीत ध्यान सीखें और नित्य अभ्यास द्वारा अपने जीवन में एक अजेय सुरक्षा कवच का निर्माण करें, जिसे कोई भी नकरात्मकता, बीमारी, चिन्ता, थकावट आदि भेद न सके और आप स्वस्थ, प्रसन्न व दीर्घायु हों।
महा हर्बल्स के वैद्यों द्वारा, कोरोना के इस समय में निम्नलिखित औषधियों को शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के लिये अनुशंसित किया हैं इन्हें लेने से रक्षा संभव होगी।


- डॉ. नितिन पाण्डे (बी.ए.एम.एस.)
 

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