आयुर्वेद में कैंसर का उपचार 

आयुर्वेद में कैंसर का उपचार 

भोपाल [ महामीडिया] ऐसा नहीं कि प्राचीन काल में कैंसर नहीं होता था पर जीवनशैली के उत्तम होने के कारण इसके रोगियों की संख्या बहुत कम थी। आयुर्वेद में हजारों वर्ष पूर्व सुश्रुत संहिता में अर्बुद अर्थात कैंसर के कारण, लक्षण एवं चिकित्सा का वर्णन है। आयुर्वेद के अनुसार गलत खान-पान एवं विकृत जीवन शैली के कारण शरीर की कोशिकाओं में वात, पित्त, कफ दोष की विषमता उत्पन्न हो जाती है। यह विकृत दोष शरीर की धातुओं रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, शुक्र में प्रवेश कर वहां पर कैंसर की उत्पत्ति करते हैं। इसलिए आयुर्वेद में इन दोषों को साम्यावस्था में लाकर एवं धातु की शुद्धि द्वारा कैंसर को समाप्त करते हैं।आयुर्वेद में औषधियां का जीन स्तर पर प्रभाव है। यह औषधियां जीन मे हुए म्यूटेशन को समाप्त करती हैं। अब कैंसर के उपचार के लिए आयुर्वेद की ओर रूझान बढ़ रहा है। कैंसर रोगी एवं उनके स्वजन सर्वसुलभ, सस्ती, प्रभावी एवं दुष्प्रभाव रहित इलाज ढूंढते हैं। शहर के शासकीय अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सतीश शर्मा के अनुसार आयुर्वेद से यह संभव है।कैंसर रोगियों का आयुर्वेद कॉलेज में आयुर्वेदिक दवाओं जैसे जैविक हल्दी, तुलसी, सदाबहार, गूग्गुलु, शिलाजीत, पुनर्नवा, काली तुलसी, सहजन आदि औषधियों से उपचार किया जाता है। यह बीमारी रोगी को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक सभी स्तर पर दुर्बल करती है, इसलिए अस्पताल में रोगी की सभी स्तर पर सहायता की जाती है।
 

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