कोरोना वायरस का जोखिम कम करती है कोलेस्ट्रॉल की दवा

कोरोना वायरस का जोखिम कम करती है कोलेस्ट्रॉल की दवा

नई दिल्ली [ महामीडिया ] हिब्रू विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता ने दावा किया है कि बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली कोलेस्ट्रॉल रोधी दवा ‘फेनोफाइब्रेट’ कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे के स्तर को सामान्य जुकाम के स्तर का करने में मददगार है। यह दावा संक्रमित मानव कोशिका पर दवा के इस्तेमाल के बाद किया गया। शोधकर्ताओं ने दावा किया कि इस दिशा में महज 5 दिन तक किए गए उपचार से वायरस लगभग पूरी तरह गायब हो गया।न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई  में बेंजामिन टेनोएवर के साथ संयुक्त शोध में पाया कि कोरोना वायरस इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसके कारण फेफड़ों में वसा का जमाव हो जाता है, जिसे दूर करने में फेनोफाइब्रेट मददगार है।विश्वविद्यालय नाहमियास की ओर से कहा गया, 'हम जिस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं यदि उसकी पुष्टि नैदानिक शोधों में भी होती है तो इस उपचार से कोविड-19 का जोखिम कम हो जाएगा और यह सामान्य जुकाम की तरह हो जाएगा।' दोनों शोधकर्ताओं ने देखा कि सार्स-सीओवी-2 स्वयं को बढ़ाने के लिए मरीजों के फेफड़ों में किस तरह से बदलाव करता है। उन्होंने पाया कि वायरस कार्बोहाइड्रेट को जलने से रोकता है जिसके परिणामस्वरूप फेफड़ों की कोशिकाओं में वसा का जमाव हो जाता है और यही परिस्थिति वायरस के बढ़ने के लिए अनुकूल होती है।उन्होंने कहा कि इसीलिए मधुमेह और उच्च कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित लोगों के कोविड-19 की चपेट में आने की आशंका अधिक होती है।फेनोफाइब्रेट फेफड़ों की कोशिकाओं को वसा जलाने में मदद करती है और इस तरह इन कोशिकाओं पर वायरस की पकड़ कमजोर हो जाती है।
 

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