क्या भारत में डेक्सामेथासोन दवा से कोरोना का इलाज होगा ?

क्या भारत में डेक्सामेथासोन दवा से कोरोना का इलाज होगा ?

पुणे [महामीडिया ]डेक्सामेथासोन  को कोरोना से जान बचाने वाली पहली डेक्सामेथासोन बताया जा रहा है।लेकिन ये दवा कितने मरीजों की जान बचाने में कारगर होती है? डॉक्टर कब से इस दवा से इलाज शुरू करेंगे? ट्रायल में कितने लोगों को शामिल किया गया था? आइए जानते हैं इस दवा से जुड़े ऐसे तमाम सवालों के जवाब-Dexamethasone दवा का ट्रायल ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से किया गया कोरोना वायरस का इलाज ढूंढने के लिए यूनिवर्सिटी The Recovery Trial नाम से कई दवाओं का ट्रायल कर रही है।ट्रायल के दौरान करीब 2000 लोगों को ये Dexamethasone दी गई थी.Dexamethasone दवा के बारे में बताया गया है कि वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले लोगों को सबसे अधिक फायदा हुआ।हल्के लक्षण वाले लोगों को इससे फायदा नहीं हुआ.ट्रायल से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि वेंटिलेटर पर रहने वाले मरीजों की मौत का खतरा 40 फीसदी से घटकर 28 फीसदी हो गया।यानी अगर पहले वेंटिलेटर पर रहने वाले 100 लोगों में 40 को मौत का खतरा रहता था तो इस दवा के इस्तेमाल से खतरा 28 लोगों तक सिमट गया.कोरोना के गंभीर केस में, वेंटिलेटर पर रहने वाले औसतन 100 मरीजों में से 60 की जान आमतौर पर बचती है।इस दवा के जरिए 12 और लोगों की जान बच गई।वेंटिलेटर पर रहने के बावजूद कुल 72 लोग ठीक हो गए. इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि वेंटिलेटर पर मौजूद अगर 8 लोगों को ये दवा दी जाए तो 1 ऐसे मरीज की जान बचेगी जो बिना इस दवा से जीवित नहीं रहते।वहीं, इस दवा से ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले मरीजों की मौत का खतरा 1/5 घट जाता है।ब्रिटेन के एक्सपर्ट का कहना है कि दवा की हल्की खुराक से ही कोरोना से लड़ने में मदद मिली।रिसर्चर प्रो. मार्टिन लैंड्रे ने कहा कि जहां भी उचित हो, अब बिना किसी देरी के हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों को ये दवा दी जानी चाहिए।लेकिन लोगों को खुद ये दवा खरीदकर नहीं खाना चाहिए।ब्रिटेन ने ट्रायल का रिजल्ट जानकारी सार्वजनिक होते ही कोरोना मरीजों पर इस दवा के इस्तेमाल की इजाजत दे दी. WHO ने भी ट्रायल के रिजल्ट को शानदार बताया है।अन्य देशों में भी इस दवा से इलाज जल्द शुरू हो सकता है.लीड रिसर्चर प्रो. मार्टिन लैंड्रे ने कहा कि दवा का ट्रीटमेंट 10 दिनों तक चलता है और इसमें प्रति मरीज सिर्फ 481 रुपये खर्च (ब्रिटेन में) आता है।यह दवा दुनियाभर में उपलब्ध भी है।भारत में भी ये दवा उपलब्ध है. ये दवा टैबलेट और इंजेक्शन, दोनों ही रूप में मरीजों को दी जाती हैं।इस दवा का इस्तेमाल 1950 के दशक से ही किया जाता रहा है।अस्थमा सहित कई अन्य बीमारियों में डॉक्टर ये दवा देते रहे हैं।इस दवा का इस्तेमाल पहले से इन्फ्लैमेशन घटाने के लिए किया जाता रहा है।


 

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