डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल सिर्फ कोरोना वायरस के गंभीर मरीजों के लिए किया जाना चाहिए

डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल सिर्फ कोरोना वायरस के गंभीर मरीजों के लिए किया जाना चाहिए

नई दिल्ली [ महामीडिया ]कोरोना वायरस महामारी से दुनियाभर में अब तक 84 लाख (8.4 मिलियन) लोग पीड़ित हो चुके हैं और 453,290 लोगों की मौत हो चुकी है। चीन के वुहान शहर में आज से करीब छह महीने पहले यह महामारी सामने आई थी जो बहुत ही कम समय में दुनिया के अधिकांश देशों को अपने चपेट में ले चुकी है।कोरोना महामारी से निपटने के लिए 10 महत्वपूर्ण वैक्सीनों का इंसानों पर ट्रायल चल रहा है। आशा है कि कुछ ही महीनों में सफलता मिलने से एक ही शॉट में कोरोना के संक्रमण का खतरा दूर हो सकेगा। लेकिन किसी वैक्सीन को सफलता मिले इससे पहले ही कई देशों ने दवा कंपनियों के साथ ऑर्डर के लिए करार करना शुरू कर दिया है।विश्व स्वास्थ्य संगठन  को आशा है कि इस साल वैक्सीन की 20-30 करोड़ खुराकें बना ली जाएंगी और साल 2021 के अंत तक दो अरब खुराकें बना ली जाएंगी। डब्ल्यूएचओ यह योजना बनाने में जुट गया है कि वैक्सीन बनने के बाद खुराक देने की प्राथमिकता कैसे तय की जाए। रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस की वैक्सीन बनने के बाद उन लोगों को पहले वैक्सीन दी जाएगी जो अस्पतालों में काम कर रहे हैं और उन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा है, जिनको पहले से कोई गंभीर बीमारी है या खतरनाक उम्र में हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि डेक्सामेथासोन को कोरोना के गंभीर किस्म के मरीजों के लिए बचाकर रखना चाहिए। क्योंकि यह एक सस्ती स्टेरॉयड है जो कोरोना की गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीजों की जान बचाने में सहायक है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के आपातकालीन कार्यक्रमों के प्रमुख माइक रायन ने कहा डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल सिर्फ कोरोना गंभीर मरीजों के लिए किया जाना चाहिए। एक ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि इस दवा को कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए बचाकर रखा जाए जिनको इस दवा से साफतौर पर लाभ होता है।डेक्सामेथासोन के ट्रायल रिजल्ट गुरुवार को घोषित हो गए। यह एक जेनरिक दवा है जिसका इस्तेमाल 1960 से अर्थराइटिस जैसी बीमारियों में जलन के लिए किया जाता है। इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना के गंभीर मरीजों में से एक तिहाई की जान बचाने मदद मिली है। इस दवा पर शोध करने वाली संस्था ने कहा कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन  कोरोना के केस में बहुत ज्यादा प्रभावशाली नहीं है। पहले एचक्यूसी की एक ऐसी दवा सामने आई थी जिसे कोरोना से जान बचाने में प्रभावी माना जा रहा था। हालांकि कुछ डॉक्टरों ने इस दवा के साइड इफेक्ट्स को लेकर चेताया है। 


 

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