एपीआई के चीनी आयात का विकल्प खोजे भारत सरकार

एपीआई के चीनी आयात का विकल्प खोजे भारत सरकार

भोपाल [ महा मीडिया ]भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सरकार दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के आयात के लिए चीन के विकल्प तलाशने पर पूरी सक्रियता से विचार कर रही है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि दुश्मन पड़ोसी पर निर्भरता की वजह से घरेलू बाजार में दवाओं की कोई किल्लत पैदा न हो। हालांकि अन्य देशों से आयात करने में कीमत और क्षमता बड़ी अड़चनें साबित हो सकती हैं।  देश के लिए कोविड-19 लॉकडाउन का अनुभव उपयोगी साबित हो रहा है। जब कोविड-19 चीन में फैला और वहां से आयात बहुत कम हो गया तो केंद्र सरकार ने वैकल्पिक रास्ता निकाला था। अब द्विपक्षीय कारोबार में कोई अवरोध पैदा होने की स्थिति में भारतीय दवा उद्योग उसी वैकल्पिक रास्ते का इस्तेमाल कर सकता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस साल फरवरी में भारतीय वाणिज्य सचिव ने करीब 200 मिशन को पत्र लिखकर उन देशों में ऐसी कंपनियां तलाशने को कहा था, जो भारतीय उद्योग के लिए खरीद का वैकल्पिक स्रोत बन सकें। करीब 15-16 मिशन ने करीब 100 व्यापार श्रेणियों में लगभग करीब 550 उत्पादों के संभावित स्रोतों के बारे में जवाबी पत्र लिखा। इन देशों में अमेरिका, इटली और कुछ अन्य यूरोपीय देशों को ऐक्टिव फार्मास्यूटिकल इन्ग्रेडिएंट्स  के आयात के लिए संभावित स्रोत के रूप में चिह्नित किया गया। हालांकि पूछताछ करने के बाद यह पाया गया कि इन देशों में एपीआई उत्पादन की इतनी अतिरिक्त क्षमता नहीं है कि वे भारतीय बाजार को आपूर्ति कर सकें।
 'ब्राजील भी एक वैकल्पिक स्रोत के रूप में विकसित हो रहा है, मगर उसका जोर घरेलू क्षमता को बढ़ाने पर है।' एक अहम अड़चन कीमत है क्योंकि चीन से आयातित माल सस्ता है।
हालांकि घरेलू दवा उद्योग का दावा है कि चीन में कुछ एपीआई पिछले करीब एक महीने से महंगे हो गए हैं। भारतीय दवा विनिर्माता संघ ने कहा, 'पैरासिटामोल या विटामिन सी आदि के एपीआई की कीमतें पिछले एक महीने के दौरान बढ़ी हैं। सभी एपीआई के दाम 20 से 25 फीसदी बढ़ गए हैं।'
दवा उद्योग के सूत्रों का मानना है कि वैकल्पिक स्रोत ढूंढना मुश्किल है क्योंकि चीन से इतर किसी देश से एपीआई खरीदना कम से कम 25 से 30 फीसदी महंगा पड़ेगा।
दवा क्षेत्र के एक उद्यमी ने कहा, 'सरकार की तरफ से हमें खरीद के लिए वैकल्पिक देश तलाशने के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है. हालांकि कुछ कंपनियों ने पहले ही दक्षिण कोरिया जैसे देशों के आपूर्तिकर्ताओं के साथ बातचीत शुरू कर दी है ताकि सीमा पर तनाव बढऩे की स्थिति में खरीद में कोई परेशानी नहीं आए।' भारत एपीआई के लिए चीन पर अत्यधिक निर्भर है।
 

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