बीमारियों से बचाने वाला और शक्तिवर्धक होता है खरना का प्रसाद  

बीमारियों से बचाने वाला और शक्तिवर्धक होता है खरना का प्रसाद  

भोपाल [ महामीडिया]   छठ महापर्व के दौरान खरना में बनने वाला प्रसाद ना सिर्फ शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, बल्कि शरीर को शक्ति भी प्रदान करता है। इस प्रसाद के खाने से शरीर को ठंड से लड़ने में भी मदद मिलती है। खरना के दिन मुख्य रूप से चोकरयुक्त आटे की घी युक्त रोटी, गुड़, दूध और साठी के चावल का खीर प्रसाद के रूप में खाया जाता है। आयुर्वेद में इन सामग्रियों का विशेष महत्व है। आम दिनों में लोग चोकरयुक्त आटा खाना लगभग छोड़ चुके हैं लेकिन खरना के प्रसाद में गेहूं के मोटे पिसे हुए आटे की रोटी ना सिर्फ बहुत ज्यादा फाइबर युक्त होती है बल्कि घी के साथ पकाने पर इसमें वसा का भी मिश्रण हो जाता है। यह रोटी बलवर्धक होती है। वहीं गुड़ और साठी का भी आयुर्वेद में खास महत्व है। गुड़, दूध और साठी के चावल से बनी खीर शरीर को ना सिर्फ मजबूत बनाती है बल्कि ठंड और रोगों से लड़ने में भी मददगार साबित होती है। गुड़ एक और शरीर के विकार को साफ करता है तो दूसरी और शरीर को गर्म रखता है। यह पाचन शक्ति को बढ़ाता है।आयुर्वेद में साठी के चावल का खास महत्व है। इस चावल के बीज को आहरा के किनारे, परती भूमि अथवा खेतों के किनारे छीट दिया जाता है और 60 दिन में यह तैयार होता है। इसमें कोई खाद अथवा रसायन भी नहीं डाला जाता है। इस चावल में सेलूलोज की भरपूर मात्रा होती है। यह चावल नस संबंधी बीमारियों, लकवा, शरीर की कमजोरी को दूर करता है। स्किन को चमकदार बनाता है। साठी का चावल काफी सुपाच्य भी होता है। आमतौर पर सामान्य चावल को गैस बढ़ाने वाला माना जाता है। दूसरे, सर्दी-खांसी जैसी बीमारियों में सामान्य चावल से परहेज किया जाता है पर साठी की तासीर गर्म है।
 

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