बच्चों की ऑनलाइन क्लास  के दौरान ऐसे सावधानी बरतें 

बच्चों की ऑनलाइन क्लास  के दौरान ऐसे सावधानी बरतें 

भोपाल [महामीडिया]  हैलो.. डाक्टर साहब मेरा सात साल का बेटा है। उसकी आंखों में अचानक जलन होने लगी है। हैलो.. डाक्टर साहब मेरी बेटी 12वीं में है, उसे रोज सिरदर्द की शिकायत हो गई। बच्चों की यह परेशानी बढ़ती जा रही है। दरअसल यह ऑनलाइन कक्षाओं की देन है जिसमें बच्चे तीन से चार घंटे तक मोबाइल या लैपटाप की स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहते हैं। जिससे उनकी आंखों का पानी सूखने लगा है। नतीजन किसी को पास का धुंधला दिखाई देने लगा तो किसी बच्चे की आंखें सूजने लगीं हैं।डॉक्टरों की मानें तो बच्चों को आंख की समस्या के मामले पिछले तीन माह में तीस फीसद तक बढ़ गए हैं। हालांकि आनलाइन कक्षा के अलावा कोरोना काल में पढ़ाई के लिए अन्य सुरक्षित विकल्प भी नहीं है लिहाजा सावधानी बरतकर ही इस समस्या से बचा जा सकता है। मालूम हो आनलाइन कक्षाओं को लेकर शिकायतें पहुंचने के बाद मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी स्कूल शिक्षा विभाग को कक्षाओं का समय कम करने कहा था। शिक्षा विभाग ने भी पहली से पांचवीं तक की आनलाइन कक्षाओं पर रोक लगा दी थी लेकिन बाद में फिर शुरू करने के आदेश जारी कर दिए थे।
बच्चों में ये शिकायतें बढ़ गईं हैं-
- नजदीक का धुंधला हो जाना।
- आंखों के ऊपर दर्द होना।
- अक्षर आपस में मिलते हुए दिखना।
- खुजली और घाव होना।
ऐसे बचाएं बच्चों की आखें-
- तीन से पांच साल के बच्चों को 3 बार में 20-20 मिनट करके ऑनलाइन क्लास लेनी चाहिए। वहीं पांच से 15 साल के बच्चे दिन में एक घंटा स्क्रीन पर बिता सकते हैं।
- कमरे में अच्छी हो और स्क्रीन की ब्राइटनेस को मध्यम रखें। स्क्रीन की कम रोशनी से रेटिना के खराब होने का खतरा रहता है।
- आंखों पर दबाव कम करने के लिए बच्चों को बीच-बीच में पलकें झपकाना सिखाएं।
- गाजर, चुकंदर, आम, पपीता, खट्टे फलों, आंवला, हरी पत्तेदार सब्जियों, बादाम, अखरोट, अंडे और मछली आदि में आंखों के लिए पोषक तत्व पाए जाते हैं।
 

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