सूर्य के उत्तरायण होने का उत्सव ही मकर संक्रांति कहलाता है

भोपाल (महामीडिया) कल सूर्य पूजा का पर्व मकर संक्रांति है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने का महत्व है। सूर्य पंच देवों में से एक हैं और साक्षात् दिखाई देने वाले देवता हैं। किसी भी शुभ काम में गणेशजी, शिवजी, विष्णुजी, देवी दुर्गा और सूर्य की पूजा अनिवार्य रूप से की जाती है। मकर संक्रांति पर सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन होता है। सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है।
मकर संक्रांति का मुहूर्त
सूर्य देव आज देर रात 02 बजकर 08 मिनट पर प्रवेश कर रहे हैं। इसके साथ ही वे 6 माह के लिए दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाएंगे। आपको सूर्योदय के बाद 07:15 बजे से स्नान करने के पश्चात दान और सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए। मकर संक्रांति का पुण्य काल सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा। आप इस बीच स्नान, दान और पूजा कर सकते हैं।
मकर संक्रांति होने का कारण
वर्ष में कुल बारह संक्रांतियां होती हैं, जिनमें से सूर्य की मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति बेहद खास हैं | इन दोनों ही संक्रांति पर सूर्य की गति में बदलाव होता है। जब सूर्य की कर्क संक्रांति होती है, तो सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन और जब सूर्य की मकर संक्रांति होती है, तो सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है। सीधे शब्दों में कहें तो सूर्य के उत्तरायण होने का उत्सव ही मकर संक्रांति कहलाता है। इसलिए कहीं- कहीं पर मकर संक्रान्ति को उत्तरायणी भी कहते हैं। उत्तरायण काल में दिन बड़े हो जाते हैं तथा रातें छोटी होने लगती हैं, वहीं दक्षिणायन काल में ठीक इसके विपरीत- रातें बड़ी और दिन छोटा होने लगता है।
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति की तो कहा जाता है की मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करने पर सभी कष्टों का निवारण हो जाता है । इसलिये इस दिन दान जप तप का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन को दिया गया दान विशेष फल देने वाला होता है । इस दिन व्यक्ति को किसी गृहस्थ ब्राह्मण को भोजन या भोजन सामग्रियों से युक्त तीन पात्र देने चाहिए। इसके साथ ही संभव हो तो यम, रुद्र और धर्म के नाम पर गाय का दान करना चाहिए। यदि किसी के बस में ये सब दान करना नहीं है, तो वह केवल फल का दान करें, लेकिन कुछ न कुछ दान जरूर करें। साथ ही मत्स्य पुराण के 98वें अध्याय के 17 वें भाग से लिया गया यह श्लोक पढ़ना चाहिए-
‘यथा भेदं न पश्यामि शिवविष्णवर्कपद्मजान्।
तथा ममास्तु विश्वात्मा शंकरः शंकरः सदा।।‘
संक्रांति पर दान करने का विशेष महत्व है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन किए गए दान का अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को कंबल, गर्म वस्त्र, घी, दाल-चावल की खिचड़ी आदि का दान करें। गरीबों को भोजन कराएं तो और भी ज्यादा शुभ रहता है।
 

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