आध्यात्मिक शांति से ही विश्व शांति संभवः ब्रह्मचारी गिरीश

भोपाल (महामीडिया) ब्रह्मलीन परमपूज्य महर्षि महेश योगी जी की 103वीं जयंती के अवसर पर महर्षि ज्ञानयुग महोत्सव प्रारंभ हुआ। महर्षि उत्सव भवन, ब्रह्मनंद सरस्वती आश्रम, भोजपुर मंदिर मार्ग छान में आज मध्यप्रदेश के विधि एवं जनसंपर्क मंत्री पी.सी शर्मा की उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ आज प्रथम दिवस ‘कानून और न्याय के माध्यम से विश्व शांति की स्थापना’ विषय पर सेमीनार हो रहा है जिसमें देश के कई ख्यातिलब्ध कानूनविद शामिल हैं। 
महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, महर्षि विश्व शांति आंदोलन एवं महर्षि विद्यामंदिर विद्यालय समूह के अध्यक्ष ब्रह्मचारी गिरीश ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि ‘हम सभी यहा दो दिवसीय ज्ञानयुग महोत्सव को मनाने के लिए एकत्रित हुए है। हमने जिनसे ज्ञान प्राप्त किया है वहीं हमारे गुरू है। महर्षि महेश योगी जी का पूरे जीवन एक लक्ष्य रहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अजेता, सुख, समृद्धि, संपन्नता, आनंद की प्राप्ति हो। भारत में हजारों कानून बने हुए है एवं प्रत्येक लोकसभा एवं विधानसभाओं में नए कानूनों का जन्म होता है। क्या कानून बना देने से शांति स्थापित हो जाएगी? शायद नहीं इसके लिए एक ही उपाय सूझता है कि प्राथमिक शिक्षा से लेकर पीएचडी तक शिक्षा में विश्व शांति को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। क्योंकि आध्यात्मिक शांति से ही विश्व शांति संभव है। इसके लिए यह जरूरी है कि हम प्रत्येक विद्यार्थी को प्रारंभिक जीवन से ही चेतना को जागृत कर दें। चेतना जागृत हो जाने से प्रकृति के नियमों का अनुपालन सुनिश्चित हो सकेगा ऐसा करने से सृष्टि का विधान जागृत हो सकेगा। इसके लिए हमें महर्षि महेश योगी जी ने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तकनीकी दी है। वह है भावातीत ध्यान । इसलिए हमें इस प्रोद्योगिकी को अपना कर चेतना को जागृत करना चाहिए। अशांति जीवन में न आने पाए इसके लिए हमें महर्षि जी के सिद्धांत पर चलना चाहिए। मनोकामनाएं पूर्ण न हो पाने से घरों में कलह बड़ रहे है इसलिए भावातीत ध्यान को अपनाना चाहिए। सुबह-शाम 15 मिनट ध्यान करना चाहिए। जिसकी चेतना जागृत होगी भगवान भी उसके सार्थी बन जाएगे। सयुक्त राष्ट्र भी कहता है। युद्ध की बात मस्तिष्क में आती है इसलिए युद्ध को रोकने के लिए शत्रुता मन में उत्पन्न नहीं होने देना चाहिए।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के विधि एवं जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भावातीत ध्यान एवं भारतीय संस्कृति का परचम पूरी दुनिया में फैलाने का कार्य महर्षि महेश योगी जी ने किया। इस प्रदेश की धरती से निकलकर पूरे विश्व के पटल पर एक महान चेतना वैज्ञानिक के रूप में जाने गए। कल उनका 103वां जन्म दिवस है। इसलिए हम चाहते है कि उनका बताया गया मार्ग और ज्ञान ब्रह्मचारी गिरीश जी जैसे संत मार्गदर्शन करें ताकि मध्यप्रदेश सरकार उसपर अमल कर सके। 
सर्वोच्च न्यायलय के सीनियर काउंसेल सी.एस. विद्यानाथन जिन्होंने अयोध्या मामले में रामलला की पैरवी की है। उन्होंने कहा कि हमारे आज के छात्र कल के नेता है वह पूरे विश्व में शांति एवं खुशहाली का नेतृत्व भविष्य में करेंगे। विधि एवं न्याय के माध्यम से विश्व शांति की स्थापना तभी हो सकती है। जब हम महर्षि महेश योगी द्वारा प्रणीत भावातीत ध्यान को अपना कर शांति एवं खुशहाली को प्राप्त करें और उस दिशा में ब्रह्मचारी गिरीश जी एवं महर्षि संस्थान बहुत सकारात्मक कार्य कर रहे हैं। 
मध्यप्रदेश उच्च न्यायलय के जस्टिस एस.के. सेठ ने कहा कि विधि एवं न्याय के माध्यम से विश्व शांति सिर्फ दो विधियों से स्थापित हो सकती है। एक है प्राकृतिक न्याय का अनुसरण करके और दूसरा है महर्षि महेश योगी द्वारा प्रणीत भावातीय ध्यान को अपनाकर। इसलिए बढ़ती हुई अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए कानून का शासन एक आदर्श है किन्तु शांति की स्थापना में सभी को अपना-अपना योगदान देना होगा।
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अघ्यक्ष जस्टिस एन.के. जैन ने अपने विचार रखते हुए कहा कि महर्षि जी द्वारा स्थापित समस्त शैक्षणिक संस्थान जो योगदान विश्व शांति में दे सकते है उससे बढ़कर कुछ और नहीं हो सकता। आज जो चेतना आधारित शिक्षा के साथ संस्कार दिए जा रहे है वह भविष्य में शांति का मार्ग ही स्थापित करेंगे। यदि हम पूरे विश्व में ऐसी शिक्षा का विस्तार कर दें तो विधि एवं न्याय के माध्यम से विश्व शांति के लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। 
भारतीय पुलिस सेवा के एस.के. जयचंदा का विचार था कि आज विश्व को शांति की बहुत जरूरत है लेकिन पूरे विश्व में शांति तभी स्थापित होगी जब भारत देश, हमारे प्रदेश एवं हमारे शहर में शांति स्थापित हो। इसलिए हमें शांति का मार्ग खोजना होगा ताकि वैकल्पिक मार्गो एवं विधियों को समायोजित कर सके। इसमें सयुक्त राष्ट्र सहित अन्य निकाय भी अपना योगदान दे रहे हैं। यदि इसी तरह प्रत्येक संस्थान राज्य, एवं सरकार पहल करे तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता हैं। इसके लिए हमें आतंकवाद को कुचलने एवं युद्धों की संभावना खत्म करने के लिए महर्षि महेश योगी जी की युक्ति को अपनाना होगा।
इलाहबाद उच्च न्यायलय के सेवा निवृत्त न्यायधीश व्ही.के. शुक्ला ने का कि विधि एवं न्याय के माध्यम से विश्व शांति की स्थापना की जा सकती है। इसके लिए जरूरी है कि जो कानून बने उसे पूरी तरह से लागू किया जाए। इसके लिए संस्थानों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के एडव्होकेट संतोष कुमार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि शांति को स्थापित किया जा सकता है वशर्ते हम महार्षि महेश योगी द्वारा बताए गए मार्ग का अनुशरण करें। मध्यप्रदेश उच्च न्यायलय के पूर्व उपमहाधिवक्ता विजय पाण्डे का कथन था कि महर्षि जी का कहना है कि जीवन आनंद है संघर्ष नहीं अगर हर कोई सिर्फ इतना ही समझ ले तो कानून की जरूरत नहीं पड़ेगी। ब्रह्मचारी गिरीश जी की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि गिरीश जी का विश्व शांति में योगदान उल्लेखनीय है और इस मंच से उठाई गई आवाज पूरी दुनिया में पहुंचेगी। 
इस अवसर पर मंच पर महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भुवनेश शर्मा भी मंच पर उपस्थित थे। सभी मंचासीन अतिथियों ने मिलकर इस अवसर पर स्मारिका, टेविल कैलेडर, महर्षि पंचाग, डायरी, ईज्ञान न्यूज लेटर एवं महामीडिया मासिक पंत्रिका का विमोचन भी किया। कार्यक्रम की शुरूआत महर्षि संस्थान की परंपरा अनुसार गुरू पूजन से प्रारंभ हुआ इसके पश्चात चार वैदिक पंण्डितों ने वैदिक शांति पाठ का मंत्रोंच्चार किया। इसके बाद समस्त अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह, पुष्पगुच्छ, मिष्ठान एवं शाल ओढ़ाकर किया गया। अंत में सभी का आभार प्रदर्शन महर्षि संस्थान के प्रमुख ब्रह्मचारी गिरीश जी ने किया।
 

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