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वैशाख मास में सोमवती अमावस्या का महत्व

वैशाख मास में सोमवती अमावस्या का महत्व

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 375 दिन 11 घंटे पूर्व
11/04/2018
भोपाल (महामीडिया) सोमवती अमावस्या का हिन्दू धर्म में विशेष महत्त्व होता है। विवाहित स्त्रियों द्वारा इस दिन अपने पतियों के दीर्घायु कामना के लिए व्रत का विधान है। इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल मिलता है। 16 अप्रैल सोमवार को आ रही सोमवती अमावस्या पर इस बार चार शुभ संयोग बन रहे हैं। वैशाख मास, सोमवती अमावस्या, सर्वार्थसिद्धि योग और अश्विन नक्षत्र। इन सभी का शुभ संयोग मिलकर सोमवती अमावस्या को विशेष बना रहा है। वैशाख मास भगवान शिव और विष्णु का प्रिय माह है और इसमें सोमवती अमावस्या का आना दान-पुण्य के लिहाज से अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी दिन सवार्थसिद्धि योग भी बन रहा है, जिसमें किए गए समस्त कार्य तुरंत शुभ फलदायी होते हैं। इसके अलावा इस दिन नक्षत्र मंडल का प्रथम नक्षत्र अश्विनी भी है। अश्विनी नक्षत्र के देवता श्रीगणेश होने से यह दिन ज्ञान, बुद्धि बढ़ाने वाला साबित होगा। सोमवती अमावस्या के दिन समस्त ग्रह-नक्षत्रों और देवताओं की कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष उपाय करें, इससे आपका जीवन सुखों से भर जाएगा। 
वैशाख अमावस्या के महत्व वाली एक कथा भी पौराणिक ग्रंथों में मिलती है। कथा है कि धर्मवर्ण नाम के एक ब्राह्मण हुआ करते थे। वह बहुत ही धार्मिक प्रवृति के थे। व्रत-उपवास करते रहते, ऋषि-मुनियों का आदर करते व उनसे ज्ञान ग्रहण करते। एक बार उन्होंने किसी महात्मा के मुख से सुना कि कलियुग में भगवान विष्णु के नाम स्मरण से ज्यादा पुण्य किसी भी कार्य में नहीं है। अन्य युगों में जो पुण्य यज्ञ करने से प्राप्त होता था उससे कहीं अधिक पुण्य फल इस घोर कलियुग में भगवान का नाम सुमिरन करने से मिल जाता है। धर्मवर्ण ने इसे आत्मसात कर लिया और सांसारिकता से विरक्त होकर सन्यास लेकर भ्रमण करने लगा। एक दिन भ्रमण करते-करते वह पितृलोक जा पंहुचा। वहां धर्मवर्ण के पितर बहुत कष्ट में थे। पितरों ने उसे बताया कि उनकी ऐसी हालत धर्मवर्ण के सन्यास के कारण हुई है क्योंकि अब उनके लिये पिंडदान करने वाला कोई शेष नहीं है। यदि तुम वापस जाकर गृहस्थ जीवन की शुरुआत करो, संतान उत्पन्न करो तो हमें राहत मिल सकती है। साथ ही वैशाख अमावस्या के दिन विधि-विधान से पिंडदान करे। धर्मवर्ण ने उन्हें वचन दिया कि वह उनकी अपेक्षाओं को अवश्य पूर्ण करेगा। तत्पश्चात धर्मवर्ण अपने सांसारिक जीवन में वापस लौट आया और वैशाख अमावस्या पर विधि विधान से पिंडदान कर अपने पितरों को मुक्ति दिलाई।
सोमवती अमावस्या के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। नदी ना हो तो घर में ही पवित्र नदियों का जल डालकर स्नान करें। इसके बाद पीपल के वृक्ष में एक तांबे के कलश से शुद्ध अर्पित करें और पीपल की सात परिक्रमा करें। इससे समस्त ग्रह दोष शांत होते हैं। 
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