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18 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर दुर्लभ योग

18 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर दुर्लभ योग

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 523 दिन 9 घंटे पूर्व
13/04/2018
भोपाल (महामीडिया) भारत संस्कृति प्रधान देश है। यहां प्रतिदिन कोई न कोइ व्रत होता रहता है। भारतीय मनीषियों ने जो व्रत बनाया है, उसका मूल उद्देश्य व्यक्ति और समाज को पथ भ्रष्ट होने से बचाना है। भारतीय गणना के अनुसार चार स्वयं सिद्ध मुहूर्त हैं। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अक्षय तृतीया, दशहरा और दीपावली। बैशाख मास के शुक्ल पक्ष के त्रितया को मनाया जाने वाला यह व्रत अपने आपमें महत्वपूर्ण है। इस वर्ष यह पर्व 18 अप्रैल को मनाया जाएगा। इसी दिन परशुराम जी का जन्मदिन भी मनाया जाता है। यह सतयुग त्रेतायुग का आरंभ, भगवान विष्णु का अवतार, द्वापर युग का समापन , गंगा का आगमन और बद्री नाथ का कपाट खुलने का दिन है।अक्षय तृतीया के अवसर पर किसी भी प्रकार का शुभ कार्य किया जा सकता है। कोई नई वस्तु खरीदना हो, शादी विवाह, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश में मुहूर्त देखना कोई जरूरी नहीं है। इस दिन किए गए दान या पूजा का अक्षय फल प्राप्त होता है। साथ में पितर संबंधी भी कार्य किया जा सकता है। इस वर्ष इस पावन पर्व पर उनका शुभ योग बन रहा है। कृतिका नक्षत्र का सौभाग्य योग, आयुष्मान योग और सर्वर्स सिद्ध योग बन रहा है। त्रितया पूरा दिनभर है। यह 18 अप्रैल को रात्रि 3 बजे तक है।

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