महामीडिया न्यूज सर्विस
सिखों का पवित्र त्यौहार बैसाखी

सिखों का पवित्र त्यौहार बैसाखी

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 495 दिन 12 घंटे पूर्व
14/04/2018
भोपाल (महामीडिया) बैसाखी के समय आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है। विशाखा नक्षत्र पूर्णिमा में होने के कारण इस माह को वैशाख कहते हैं। इस प्रकार वैशाख मास के पहले दिन को बैसाखी कहा गया है और पर्व के रूप में माना गया है। बैसाखी अप्रैल में तब मनाया जाता है, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। इसी समय सूर्य की किरणें गर्मी का आगाज करती हैं। इन किरणों के प्रभाव से जहां रबी की फसल पक जाती है, वहीं खरीफ की फसल का मौसम शुरू हो जाता है। इस पर्व की धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता भी काफी है। लोग देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तरी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जहां बैसाखी के रूप में उल्लास का रंग दिखता है। जिस कारण बैसाखी को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है वह खालसा पंथ की स्थापना है। खालसा शब्द खालिस से बना है, जिसका अर्थ शुद्ध, पावन या पवित्र होता है। गुरु गोबिंद सिंह ने सन 1699 में इसी दिन आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की नींव रखी थी। इसलिए भी बैसाखी पर्व सूर्य की तिथि के अनुसार मनाया जाने लगा। गुरु गोबिंद सिंह ने गुरु के बलिदान के बाद, धर्म की रक्षा के लिए बैसाखी के दिन अलग-अलग जातियों, धर्मों और क्षेत्रों से चुनकर पंच प्यारों को अमृत छकाया। बैसाखी के सभी रीति रिवाज पूर्ण हो जाने पर हलवा का वितरण किया जाता है। सिख समुदाय में गुरु का लंगर भाईचारे के नाम से बांटा जाता है। बैसाखी का सबसे पवित्र रिवाज होता है कि लंगर खाते वक्त सिरपर कपड़ा ढका जाता है। इस दिन शोभायात्रा निकाली जाती है। इस दिन पारपंरिक डांस भागंरा किया जाता है। ढोल, नगाड़े बजाकर, रंग बिरंगे कपड़े पहनकर नृत्य किया जाता है। बैसाखी रीति रिवाज, नृत्य, उत्सव और शोभायात्रा के अलावा अपने प्रियजनों से मिलने और उनके साथ वक्त बिताने का त्योहार है। 
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