महामीडिया न्यूज सर्विस
भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहब फाल्के

भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहब फाल्के

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 508 दिन 14 घंटे पूर्व
30/04/2018
मुंबई (महामीडिया) आज भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहब फाल्के की जयंती है। भारतीय सिनेमा का सूत्रधार दादा साहब फाल्के का जन्म 30 अप्रैल 1870 को नासिक के पास त्रयंबकेश्वर में एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। फाल्के को बचपन से ही कला के प्रति एक लगाव था। 15 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के सबसे बड़े कला शिक्षा केंद्र जे.जे स्कूल ऑफ़ आर्ट्स में दाखिला लिया। दादासाहब ने मूक फ़िल्म 'राजा हरिश्चंन्द्र' के बाद दो और पौराणिक फ़िल्में 'भस्मासुर मोहिनी' और 'सावित्री' बनाई। 1915 में अपनी इन तीन फ़िल्मों के साथ दादासाहब विदेश चले गए।भारत सरकार ने साल 1969 में उनके नाम पर फाल्के अवॉर्ड शुरू किया। भारतीय सिनेमा का यह सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है जो उन हस्तियों को दिया जाता है, जो सिनेमा जगत में उल्लेखनीय योगदान देते हैं। साल 1969 में पहला दादा साहब फाल्के पुरस्कार अभिनेत्री देविका रानी को दिया गया था।  कोल्हापुर नरेश के आग्रह पर 1938 में दादासाहब ने अपनी पहली और अंतिम बोलती फ़िल्म 'गंगावतरण' बनाई। फाल्के के फ़िल्म निर्माण के प्रयास और फ़िल्म 'राजा हरिश्चंद्र' के निर्माण पर मराठी में एक फीचर फ़िल्म 'हरिश्चंद्राची फॅक्टरी' 2001 में बनी, जिसे देश विदेश में सराहा गया। जनवरी 1944 में दादा साहेब ने लाइसेंस के लिए अंग्रेज़ी हुकूमत को एक चिट्ठी लिखी। 14 फ़रवरी 1944 को जवाब आया कि आपको फ़िल्म बनाने की इजाज़त नहीं मिल सकती। कहा जाता है कि उस दिन उन्हें ऐसा सदमा लगा कि दो दिन के भीतर ही वो चल बसे। लेकिन, आज भी हिंदी सिने जगत दादा साहब फाल्के का नाम पूरे सम्मान से लेता है इस मौके पर गूगल ने डूडल बनाकर भारतीय फ़िल्म के इस जादूगर को उनकी 148 वीं जयंती पर याद किया है। 
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