महामीडिया न्यूज सर्विस
बाल विवाह के पक्ष में होना एक घातक विचारधारा है

बाल विवाह के पक्ष में होना एक घातक विचारधारा है

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 40 दिन 16 घंटे पूर्व
08/05/2018
भोपाल (महामीडिया)   पुरुष अपने पुरुषत्व बल की सत्ता में आ रहे उतार-चढ़ावों को देख बहुत घबराया हुआ है. इस समाज को बेहतर, समान और न्यायमूलक बनाने के लिए हो रही कोशिशों से उसके अपराधों और निरंकुशता पर नियंत्रण लग रहा है, तो वह बहुत बेचैन है.उसकी पूंजीवादी, उपनिवेशवादी और मर्दवादी सत्ता को चुनौती मिल रही है. ऐसे में उसे कई बार नैतिक और अनैतिक, मानवीय और अमानवीय, क़ानूनी और गैरक़ानूनी पक्ष के बीच के अंतर का भान ही नहीं रह जाता है. मध्य प्रदेश की विधानसभा के सदस्य यानी चुने हुए विधायक ने अपनी वाणी से इन बिंदुओं को सच साबित किया है.5 मई 2018 को आजीविका और कौशल विकास दिवस पर अपने विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने भी अपने ?मन की बात? कह डाली. बहरहाल, इस बात का आयोजन की कथावस्तु से कोई सरोकार नहीं था, पर बेचैनी फुदक कर बाहर आ गई.परमार ने कहा, ?गांव में पहले संबंध बन जाते थे, जिससे उनकी मानसिकता बन जाती थी कि मेरा संबंध हो चुका है या शादी हो चुकी है, इसलिए वे गलत कदम उठाने से बच जाते थे. पहले देखते थे कि समाज में शादी होती थी. हमारे बड़े-बूढ़े ही संबंध तय कर लेते थे. भले ही बचपन में कर लेते थे, लेकिन वह संबंध ज्यादा टिके रहते थे, ज्यादा मजबूत थे. जब से यह 18 साल की बीमारी सरकार ने चालू की है, इसमें बहुत सारी लड़कियां घर से भागने लग गई हैं. लव जिहाद का बुखार चालू हो गया है. हमें घर में ध्यान ही नहीं है कि हमारी छोरी क्या कर रही है, हमें कह कर जा रही है कि पढ़ने के लिए कोचिंग क्लास जा रही हूं और वह किसी भी लड़के के साथ भाग गई.?यहीं नहीं रुके. उन्होंने आगे कहा, ?बहुत सारे शरारती लोग आते हैं. शातिर लोग आते हैं. हमारी माता-बहनें लिहाज़ पालने वाली होती हैं, इनके साथ कोई उपकार कर देता है तो उनका बहुत सारा अहसान मानती हैं. अगर वह किसी लड़के के साथ भाग गई तो आपकी इज्ज़त के साथ खिलवाड़ हो जाएगा. इसलिए यह पता लगाने की आपकी जिम्मेदारी बनती है कि लड़की गई तो कहां गई है? मैंने क़ानूनी उम्र में पंहुचने से पहले ही अपने तीनों बच्चों का विवाह कर दिया था, अब वे खुश हैं. वे मानते हैं कि जैसे पशुओं को पता होता है कि शाम को लौटकर कहां जाना है, वैसे ही शादी के बाद बच्चों को पता होता है कि कहां लौटना है??साथ ही बोले, ?मुसलमानों में कुछ गुंडा तत्व होते हैं, जो नाम और पहचान छिपाकर लड़कियों को प्रभावित कर लेते हैं. यदि कम उम्र में शादी कर दी जाए, तो लव जिहाद से उन्हें बचाया जा सकता है.?ये किसी एक व्यक्ति के विचार नहीं बल्कि एक विभाजनकारी विचारधारा के प्रतीक वाक्य हैं. इस विचारधारा में स्त्रियों, बच्चों, क़ानून, समाज में बराबरी, सहिष्णुता और सुरक्षा के प्रति कोई सम्मान नहीं है. याद रखिएगा कि बाल विवाह केवल लड़कियों के जीवन को संकुचित और दुरूह नहीं बनाता है, यह लड़कों के जीवन को भी उतना ही प्रताड़ित करता है.
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