महामीडिया न्यूज सर्विस
मेरे पास 'माँ' है

मेरे पास 'माँ' है

admin | पोस्ट किया गया 493 दिन 8 मिनट पूर्व
13/05/2018
भोपाल (महामीडिया)  माँ की जगह कोई नहीं ले सकता। यह बात न केवल असल जिंदगी में बल्कि फिल्मों में भी कई बार साबित हो चुकी हैं। बॉलीवुड में कई हीरोइनों ने बड़े पर्दे पर मां के रोल को इस तरह से निभाया कि वह हमेशा के लिए अमर हो गया। ऐसी ही एक मां थीं निरूपा रॉय। आज मदर्स डे पर उन्हें याद करते हैं।
1955 में आई फिल्म मुनीमजी में  देवानंद उनसे उम्र में बड़े थे लेकिन वह देवानंद की मां बनीं। अपने सशक्त अभिनय के लिए वे सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित की गईं। फिल्मीस्तान की इस फिल्म में उनका अभिनय लाजवाब था। फिल्म 'छाया' में उन्होंने एक बार फिर मां की भूमिका निभाई। इसमें वे आशा पारेख की मां बनीं। फिल्म में भी उनके जबरदस्त अभिनय को देखते हुए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी पहचान मां के किरदार के तौर पर होने लगी। 1975 में आई अमिताभ बच्चन की फिल्म दीवार में निरूपा रॉय ने मां का किरदार निभाया था। इसमें वह अमिताभ और शशि कपूर की मां बनी थीं। इस फिल्म में एक मां का अपने बेटे को गलत रास्ते से सही रास्ते पर कैसे लेकर आती है उसी का संघर्ष दिखाया गया है। इस फिल्म में एक किरदार अमिताभ अपने भाई शशि कपूर से कहता है, मेरे पास बंगला है गाड़ी है पैसा है तुम्हारे पास क्या है। शशि कपूर का जवाब होता है, मेरे पास मां है। भले अमिताभ और शशि कपूर के बीच यह संवाद हुए हो। लेकिन दर्शकों के मन में निरूपा राय की मां की छवि सामने आई। उन्होंने इस किरदार को जीवंत कर दिया।  एक मां का स्वरूप जिसे वह पिछले दो दशक से पर्दे पर साकार होते देख रहे थे। लगा कि इस संवाद में ही उनके फिल्मों के योगदान के प्रति सम्मान भी दिया गया। मां का स्वरूप निरूपा के साथ जुड़ा। निरूपा राय के सिने करियर पर नजर डालने पर पता चलता है कि सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की मां के रूप में उनकी भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही है। इसके बाद खून पसीना, मुकद्दर का सिकंदर, अमर अकबर एंथोनी, सुहाग, इंकलाब, गिरफ्तार, मर्द और गंगा-जमुना सरस्वती जैसी फिल्मों में भी वे अमिताभ बच्चन की मां की भूमिका मे दिखाई दीं।
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