महामीडिया न्यूज सर्विस
आतंकियों पर काबू पाने के लिए 15 साल बाद सेना करेगी 'कासो' का इस्तेमाल

आतंकियों पर काबू पाने के लिए 15 साल बाद सेना करेगी 'कासो' का इस्तेमाल

Admin Chandel | पोस्ट किया गया 675 दिन 13 घंटे पूर्व
12/05/2017
श्रीनगर [महामीडिया]:  कश्मीर में लगातार सेना और पुलिस के जवानों पर हो रहे हमले से परेशान सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ अपने अभियान में एक स्थायी विशेषता के तौर पर ?घेरा डालना और तलाशी अभियान? (कासो) को एक बार फिर से शुरू करने का फैसला किया है. यह प्रणाली 15 साल के बाद फिर से इस उपयोग में लाई जायेगी. बता दें की 15 साल पहले इस कार्य प्रणाली का इस्तेमाल छोड़ दिया गया था.  कासो का उपयोग कश्मीर के आतंकवाद प्रभावित कुलगाम, पुलवामा, तराल, बडगाम और शोपियां में बड़े पैमाने पर किया जाएगा. कासो 15 साल के अंतराल के बाद आतंक रोधी अभियानों के तहत एक स्थायी विशेषता होगी.
सेना ने स्थानीय आबादी के सख्त विरोध और उन्हें होने वाली असुविधा के बाद कासो को बंद कर दिया था और 2001 के बाद सिर्फ विशेष खुफिया सूचना मिलने पर ही घेरा डालने और तलाशी अभियान चलाया जाता था. हालांकि, सुरक्षा प्रतिष्ठानों को लगता है कि ऐसे अभियानों के दौरान होने वाली दिक्कतों की वजह से सुरक्षा बल स्थानीय आबादी से अलग पड़ जाते है. हाल ही में सेना के युवा अधिकारी लेफ्टिनेंट उमर फयाज़ की शोपियां में कर दी गई थी. इस हत्या को ध्यान में रखकर कासो को फिर से शुरू करने का फैसला किया गया है. पिछले कुछ महीनों में, आतंकवादियों ने बैंकों को लूट लिया है.सुरक्षा बलों को मार डाला और उनके हथियार छीन लिए थे. सशस्त्र बलों ने पिछले हफ्ते दक्षिण कश्मीर में 4000 सैनिकों के सहारे एक बड़ा अभियान चलाया था जिससे रणनीति में बदलाव का संकेत मिलता है. भारत के दो सुरक्षाकर्मियों का सिर काटे जाने के बाद सेना पाकिस्तानी गोलीबारी का भी मुंहतोड़ जवाब दे रही है. सूत्रों ने बताया, पाकिस्तान की ओर पिछले तीन महीने में आठ लोग मारे गए जबकि 17 अन्य घायल हुए.

और ख़बरें >

समाचार